गुड़गांव का मनेसर कार बनाने वाली कंपनी सुजुकी के मैन्यूफैक्चिरिंग प्लांट की वजह से देशभर में जाना जाता है। लेकिन 18 जुलाई 2012 को यहां हुए खूनी खेल ने पूरे देश को दहला दिया था।
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इस खूनी खेल में कंपनी के महाप्रबंधक जिंदा जल गए थे। हिंसा पर उतारु कर्मचारियों का आरोप था कि उनकी अनदेखी कर वहां कम मेहनताने पर लोगों को भर्ती किया जा रहा है।
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एक कर्मचारी और उसके सुपरवाइजर के बीच हुई ये बहस कुछ ही देर में व्यापक हिंसा में तब्दील हो गई जिसने आस-पास के गांवों को भी अपनी चपेट में ले लिया।
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साल 2012 में मानेसर स्थित मारुति सुजुकी के प्लांट में भड़की हिंसा और उसके बाद हुई आगजनी मामले में कोर्ट ने आज 148 आरोपियों में से 31 लोगों को दोषी करार दे दिया है। अन्य को कोर्ट ने रिहा कर दिया।
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गौरतलब है कि उस साल प्लांट का सुपरवाइजर कम वेतन पर अस्थाई कर्मचारियों की भर्ती कर रहा था जिसकी वजह से प्लांट में पहले से कार्यरत श्रमिक नाराज थे। इसी कारण एक श्रमिक और सुपरवाइज के बीच विवाद हो गया। जो बाद में खूनी हिंसा में तब्दील हो गई।
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बेरहमी से पिटाई के बाद जिंदा जले थे जीएम: मानेसर के मारुति कारखाने में बुधवार शाम श्रमिकों की मारपीट व आगजनी के बाद मिला शव कंपनी के महाप्रबंधक [एचआर] अवनीश कुमार देव का निकला। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनके जिंदा जलने की बात सामने आई। शव की पहचान महाप्रबंधक के साले ने होठ, दांत और झुलसने बचे गाल के थोड़े से हिस्से पर निशान देखकर की।
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गौरतलब है कि श्रमिक व सुपरवाइजर के बीच साल 2012 में विवाद हुआ था तो उसके बाद यूनियन नेताओं के भड़काने पर श्रमिकों के तांडव के बाद से महाप्रबंधक अवनीश कुमार लापता थे। उसी दिन रात करीब साढ़े नौ बजे पुलिस ने पेंट शॉप से एक जला शव बरामद किया था। तभी कयास लगाए जा रहे थे कि शव अवनीश का हो सकता है। पुष्टि अगले दिन अपराह्न साढ़े तीन बजे डीसीपी महेश्वर दयाल ने की।
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मूल रूप से अवनीश एजी कॉलोनी, कडरू, रांची के रहने वाले थे। वह दिल्ली के मालवीय नगर स्थित शिवालिक पार्क में रहते थे। पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर दीपक माथुर ने बताया था कि अवनीश के दोनों पैर टूटे थे। उनके पेट व सिर में भी चोट थी। इससे पता चलता है कि उनकी बेरहमी से पिटाई की गई थी। लेकिन मौत आग में जलने से हुई।
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एसाआईटी को सौंपी गई थी जांच: इस घटना में तीन जापानी अधिकारी समेत कुल 46 लोग घायल हुए थे। सरकार ने मामले की जांच एसआईटी को सौंपी थी। बर्खास्त कर्मियों पर आरोप है कि वह मारुति-सुजुकी के मानसेर प्लांट में आगजनी और तोड़फोड़ में संलिप्त थे। एचआर मैनेजर की हत्या भी उस दौरान हो गई थी।
2300 कर्मचारी हुए थे बर्खास्त: मारुति के मानेसर प्लांट में 18 जुलाई, 2012 को हिंसा के बाद तकरीबन 2,300 कर्मचारी बर्खास्त किए गए थे। इसमें 546 स्थाई कर्मचारी, 1,800 कांट्रैक्ट सहित कैजुलअ और ट्रेनी थे। बता दें कि 2012 में हुई हिंसा में मारुति प्लांट के महाप्रबंधक अवनीश कुमार देव जलकर मर गए थे। इसके बाद काफी समय तक प्लांट में काम ठप रहा था। आरोपी कर्मचारियों को बर्खास्त भी कर दिया गया था।