मूत्राशय से निकाले गए पत्थर
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मूल रूप से मध्य प्रदेश के मुरैना का रहने वाले दीपक दो साल पहले घर में ऊंचाई से गिरने से रीढ़ की हड्डी में चोट के शिकार हो गए थे। उनका आईएसआईसी में इलाज चल रहा था, जहां पर उन्हें इलाज और पुनर्वास के उद्देश्य से डॉ. एच.एस. छाबड़ा को रेफर किया गया था। आईएसआईसी के डॉ. प्रशांत जैन ने कहा कि लकवाग्रस्त सभी मरीजों में लोअर यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन होते हैं, इससे मूत्राशय और आंत्र प्रभावित होती है। पीड़ित का मूत्राशय भी ठीक से काम नहीं कर रहा था इसलिए उनमें कैथेटर लगाना पड़ा। इसे सेकेंडरी न्यूरोजेनिक ब्लैडर कहा जाता है। जब मरीज की जांच की तो उनके मूत्राशय में कई पत्थर थे, जो धीरे-धीरे बढ़ रहे थे। एक्स-रे के बाद हमने अन्य जांचों के साथ एक सीटी स्कैन भी करवाया। सीटी स्कैन में मूत्राशय में कम से कम 16 पत्थरों के होने का पता चला।