आज योगी आदित्यनाथ का जन्मदिन है। पांच जून 2017 को वह 44 साल के हो गए। हम आपको बता रहे हैं एक मामला, कि कैसे एक फरियादी की शिकायत पर योगी का एक्शन वाहवाही लूट गया। उत्तराखंड में भी ऐसी ही एक शिकायत मिली। क्या हुआ उसका, पढ़कर आप भी चौंक जाएंगे।
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मामला उस वक्त का है, जब उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड में भाजपा के दो बड़े चेहरों ने सत्ता संभाली। यूपी में एक पीड़ित ने सीएम योगी आदित्यनाथ को ट्वीट किया तो न केवल मामला दर्ज हुआ बल्कि कई पुलिसकर्मी भी नप गए, ठीक इसी तरह देहरादून में पुलिस की लापरवाही को लेकर सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत को ट्वीट किया गया लेकिन कोई एक्शन नहीं हुआ। क्या हुआ उस शिकायत आगे पढ़ें...
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chandu
अमर उजाला ने चंदू के ट्वीट और सीएम के रिट्वीट की पड़ताल की तो सरकारी तंत्र की यह पोल खुलकर सामने आई। अमर उजाला के संबंधित अधिकारियों को फोन खड़खड़ाने के बाद तंत्र को पता चला कि सीएम ने ऐसा कोई ट्वीट किया है। सीएम के ट्वीट पर कौन अधिकारी संबंधित महकमे को अवगत करवाएगा, यह तक किसी को स्पष्ट नहीं था। उनके सचिवालय को भी इसकी जानकारी नहीं है।
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छाया
दरअसल, देहरादून जनपद के नेहरू कालोनी निवासी चंदू फर्सवाण की बहन छाया को अज्ञात कार ने टक्कर मार दी थी। कार की टक्कर में छाया(17 वर्ष) बुरी तरह जख्मी हो गई। अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां छाया के ऑपरेशन के बाद पैर में रॉड डाली गई है। छाया के भाई चंदू ने नेहरू कालोनी थाने में मामले की शिकायत की। कई दिन बीतने पर भी जब कोई कार्रवाई न हुई तो उन्होंने मामले में सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत को ट्वीट किया।
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tweet
चंदू ने अपने ट्वीट में लिखा कि ‘उनकी बहन को किसी अज्ञात कार द्वारा टक्कर मारी गई लेकिन मामले में अभी तक पुलिस की कोई कार्रवाई नहीं हो पाई। आपसे निवेदन है कि मामले में पुलिस को उचित कार्रवाई के लिए निर्देशित करें’।
खैर, अमर उजाला के सवाल-जवाब के बाद जब आला अधिकारियों के फोन तो घटघनाए तो दो घंटे पचास मिनट के बाद देर शाम मुकदमा तो दर्ज कर लिया गया, मगर पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।