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अलविदा 2018: पहले उठी मां-बाप और भाई की अर्थी, फिर घर से विदा हुई बेटी की डोली, तस्वीरें रुला देंगी

Sun, 30 Dec 2018 12:16 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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साल भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन इस बिटिया के जख्म शायद ही भरे हों। जी हां, जब घर से मां-बाप और भाई की अर्थी उठी हो और दूसरी तरफ बेटी की डोली तो देखकर हर किसी की आंखे भर आई।  तमाम सामाजिक कुरीतियों और अपशगुनों के बंधन काटते हुए उस घर में लाड़ली की डोली उठी, जहां तीन दिन पहले बाबुल के साथ तीन-तीन अर्थियां उठी थी।
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रुड़की में 27 अप्रैल को दस सालों से एक परिवार में रह रहे प्रताप सिंह ठाकुर ने राजसिंह उसकी पत्नी बबली और बेटे प्रदीप की फरसे काटकर निर्मम हत्या कर दी थी। इस दर्दनाक घटना के बाद बेटी के लिए गांव वाले ही उसका परिवार बन गए। ग्रामीणों ने भी बिटिया के विवाह में बढ़-चढ़कर न केवल हिस्सा लिया बल्कि अपनी क्षमता के अनुसार कन्यदान देकर घर के जरूरी साजो समान के साथ विदा किया।
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शादी की सभी रस्में भी अदा की गई। विदाई के समय लाड़ली अपने भाई के गले लगकर जी भरकर रोई।  लड़की के घर जस्सुवाला ब्लॉक विकास नगर देहरादून से बारात गांव पहुंची। जिसमें दूल्हा संदीप पुत्र हरपाल, ससुर हरपाल, दादा जयप्रकाश, भाई अंकुश, फूफा सुशील, मामा सुखबी और गांव के दो अन्य लोग शामिल थे। बारातियों के खाने पीने के अच्छे इंतजाम सहित विवाह की सभी रस्में आयोजित की गई।

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विदाई के समय समूचे गांव और वहां पहुंचे लोगों के आंखों में आसूं उमड़ रहे थे। हर कोई नम आंखों से बिटिया को दिल से आशीर्वाद और दुआ दे रहा था।  इस दौरान मानसी के मामा नरेश सैनी, रमेश सैनी निवासी बंजारेवाला अपने पूरे परिवार के साथ पहुंचे थे। परिवार के मुअज्जिज लोग इलमचंद, रणबीर, राजेंद्र, विनोद, तेल्लूराम, सोनू, संजय आदि ने भी सभी रस्में पूरी कराने में सहयोग दिया। 
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राजसिंह ने अपनी बेटी का दहेज का सामान पहले ही ससुराल भिजवा दिया था। जेवर आदि भी खरीद लिए थे। उस दिन जब विदाई हुई तो भाई अजय के गले से लगकर जी भरकर रोई। ताऊ सतपाल और अन्य रिश्तेदारों से विदाई लेते समय मानसी के दुखों का कोई पारावार नहीं दिखाई पड़ रहा था।
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बाबुल के दिए जेवर को बिटिया ने पहना तो मानो आसूओं का सैलाब उमड़ पड़ा। गम और खुशी के माहौल में बिटिया के साथ रिश्तेदारों के अलावा समूचा गांव खड़ा था। ग्रामीणों ने बताया कि राजसिंह ने अपनी बेटिया का दहेज का सामान पहले ही ससुराल भिजवा दिया था। जेवर आदि की भी खरीदारी कर ली थी।
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