उत्तराखंड के कुमाऊं के तीन जुनूनी युवा राइडरों ने मोटरसाइकिल से हिमाचल प्रदेश के कई दर्रों को पार कर दुनिया के सबसे खतरनाक रास्तों में शुमार किलाड़ से इश्तियारी तक सुरक्षित सफर कर एडवेंचर एंड थ्रिल में नया इतिहास रचा है।
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adventure and thrill trip
- फोटो : Amarnath/AmarUjala
चिनाब नदी के किनारे 25 किमी का यह रूट चंबा जिला में पड़ता है। बुलेट से 12 दिनों में करीब 5400 किमी साहसिक और रोमांच भरा सफर करने वाले इन युवा रोडोग्राफरों का दावा है कि उत्तराखंड का यह पहला दल है, जिसने इस बेहद खतरनाक रास्ते को पार किया है।
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- फोटो : AmarUjala
इस साहसिक सफर में हल्द्वानी के मनीष चौधरी (30 वर्ष) और गोविंद राय (33 वर्ष) के साथ काशीपुर के अंशुमान चतुर्वेदी (35 वर्ष) शामिल रहे। यह दल विगत 26 सितंबर को हल्द्वानी से वाया देहरादून, चंडीगढ़ होते हुए कई निर्जन और दुरुह रास्तों से गुजर कर यह दल पांगी घाटी स्थित साच (पास) दर्रा पहुंचा।
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इस पास को बिग डैडी ऑफ ऑल माउंटेन पासेस कहा जाता है। उसके बाद किलाड़ से इश्तियारी रूट पर सफर किया, जो दुनिया का सबसे खतरनाक रूट माना जाता है। यहां तक कि आसपास के लोग भी इस खतरनाक रास्ते पर चलने से डरते हैं।
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- फोटो : AmarUjala
यह दल रोहतांग दर्रा के बेस से होते हुए चंद्रताल बेस कैंप में रुका और अगले दिन कुंजुम दर्रा होते हुए खूबसूरत स्पीति घाटी के काजा पहुंचा और फिर यहां से किन्नौर जिले के कल्पा के रोगही गांव (तिब्बत बार्डर) तक गया और आठ अक्तूबर को सुरक्षित हल्द्वानी लौट आया।
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- फोटो : Amarnath/AmarUjala
प्रकृति प्रेमी इन बाइकरों ने न केवल खूबसूरत घाटियों को करीब से देखा, बल्कि उन्हें कैमरों में भी कैद किया। साहसिक पर्यटन में रुचि रखने वाले इन युवाओं ने खुद की बदौलत करीब 30-30 हजार रुपये खर्च कर 12 दिनों में यह रोमांचक अभियान पूरा किया। टीम लीडर आशीष के मुताबिक किलाड़ से 12 किमी आगे आर्मी चेक पोस्ट पर पहली बार यूके नंबर की बुलेट वहां दर्ज की गई।
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- फोटो : Amarnath/AmarUjala
इससे पहले लेह-लद्दाख तक बाइकिंग कर चुके आशीष चौधरी ने हिमाचल से लौटने के बाद बताया कि किन्नौर जिले के आखिरी गांव रोगही तक पहुंचना रोमांच भरा रहा। वहां के लोग प्रकृति प्रेमी और शांतिप्रिय हैं।
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वह अब भी अपनी संस्कृति को सहेजे हुए हैं। हिमाचली टॉपी पहनने वाले ये लोग मानवीय मूल्यों को समझते हैं। बता दें कि आशीष को बाइक राइडिंग का शौक है और अगली बार वह किलाड़ से इश्तियारी के बीच सोलो बाइकिंग का रिकॉर्ड बनाना चाहते हैं।
हालांकि वह कुसुमखेड़ा में प्रॉपर्टी और बिल्डिंग कंस्ट्रशन का काम करते हैं। गोविंद हल्द्वानी में बुलेट वर्कशॉप चलाते हैं, जबकि अंशुमान नैनीताल के पदमपुरी में फ्लोरीकल्चर काम करते हैं।