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दुनिया के सबसे खौफनाक रास्ते पर जांबाजों ने दौड़ाई बाइक, तस्वीरें दंग कर देंगी

Sat, 05 Nov 2016 08:30 PM IST
अमरनाथ/अमर उजाला, हल्द्वानी
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adventure and thrill trip - फोटो : Amarnath/AmarUjala
उत्तराखंड के कुमाऊं के तीन जुनूनी युवा राइडरों ने मोटरसाइकिल से हिमाचल प्रदेश के कई दर्रों को पार कर दुनिया के सबसे खतरनाक रास्तों में शुमार किलाड़ से इश्तियारी तक सुरक्षित सफर कर एडवेंचर एंड थ्रिल में नया इतिहास रचा है।
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adventure and thrill trip - फोटो : Amarnath/AmarUjala
चिनाब नदी के किनारे 25 किमी का यह रूट चंबा जिला में पड़ता है। बुलेट से 12 दिनों में करीब 5400 किमी साहसिक और रोमांच भरा सफर करने वाले इन युवा रोडोग्राफरों का दावा है कि उत्तराखंड का यह पहला दल है, जिसने इस बेहद खतरनाक रास्ते को पार किया है।
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road trip - फोटो : AmarUjala
इस साहसिक सफर में हल्द्वानी के मनीष चौधरी (30 वर्ष) और गोविंद राय (33 वर्ष) के साथ काशीपुर के अंशुमान चतुर्वेदी (35 वर्ष) शामिल रहे। यह दल विगत 26 सितंबर को हल्द्वानी से वाया देहरादून, चंडीगढ़ होते हुए कई निर्जन और दुरुह रास्तों से गुजर कर यह दल पांगी घाटी स्थित साच (पास) दर्रा पहुंचा।

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road trip - फोटो : Amarnath/AmarUjala
इस पास को बिग डैडी ऑफ ऑल माउंटेन पासेस कहा जाता है। उसके बाद किलाड़ से इश्तियारी रूट पर सफर किया, जो दुनिया का सबसे खतरनाक रूट माना जाता है। यहां तक कि आसपास के लोग भी इस खतरनाक रास्ते पर चलने से डरते हैं।
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road trip - फोटो : AmarUjala
यह दल रोहतांग दर्रा के बेस से होते हुए चंद्रताल बेस कैंप में रुका और अगले दिन कुंजुम दर्रा होते हुए खूबसूरत स्पीति घाटी के काजा पहुंचा और फिर यहां से किन्नौर जिले के कल्पा के रोगही गांव (तिब्बत बार्डर) तक गया और आठ अक्तूबर को सुरक्षित हल्द्वानी लौट आया।
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road trip - फोटो : Amarnath/AmarUjala
प्रकृति प्रेमी इन बाइकरों ने न केवल खूबसूरत घाटियों को करीब से देखा, बल्कि उन्हें कैमरों में भी कैद किया। साहसिक पर्यटन में रुचि रखने वाले इन युवाओं ने खुद की बदौलत करीब 30-30 हजार रुपये खर्च कर 12 दिनों में यह रोमांचक अभियान पूरा किया। टीम लीडर आशीष के मुताबिक किलाड़ से 12 किमी आगे आर्मी चेक पोस्ट पर पहली बार यूके नंबर की बुलेट वहां दर्ज की गई।
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road trip - फोटो : Amarnath/AmarUjala
इससे पहले लेह-लद्दाख तक बाइकिंग कर चुके आशीष चौधरी ने हिमाचल से लौटने के बाद बताया कि किन्नौर जिले के आखिरी गांव रोगही तक पहुंचना रोमांच भरा रहा। वहां के लोग प्रकृति प्रेमी और शांतिप्रिय हैं।

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road trip - फोटो : Amarnath/AmarUjala
वह अब भी अपनी संस्कृति को सहेजे हुए हैं। हिमाचली टॉपी पहनने वाले ये लोग मानवीय मूल्यों को समझते हैं। बता दें कि आशीष को बाइक राइडिंग का शौक है और अगली बार वह किलाड़ से इश्तियारी के बीच सोलो बाइकिंग का रिकॉर्ड बनाना चाहते हैं।
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road trip - फोटो : Amarnath/AmarUjala
हालांकि वह कुसुमखेड़ा में प्रॉपर्टी और बिल्डिंग कंस्ट्रशन का काम करते हैं। गोविंद हल्द्वानी में बुलेट वर्कशॉप चलाते हैं, जबकि अंशुमान नैनीताल के पदमपुरी में फ्लोरीकल्चर काम करते हैं।
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