आज तापमान कितना है, कल कितना रहने वाला है, बीते एक माह में तापमान कितना उठा, कितना गिरा, आज उमस कितनी रही... ऐसे तमाम सवालों को जवाब तैयार करती है चाबी वाली मशीनें। देहरादून स्थित मौसम विभाग की सर्वे ऑफ इंडिया परिसर में मौसम विभाग की इनवेंट्री में बारिश, तापमान, उमस, सूर्य विकिरण और हवा जैसे तमाम तत्वों की जांच के लिए मशीनें मौजूद हैं।
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कभी देखी हैं, मौसम का हाल बताने वाली अजब-गजब मशीनें
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विकिरण की महंगी मशीनें: मौसम विभाग की इनवेंट्री की छत पर सूर्य के विकिरण की जानकारी देने वाली विशेष और महंगी मशीनें भी लगी हैं। इससे पता चलता है कि अल्ट्रावायलेट किरणों का असर कितना है। इसी छत पर हवा की रफ्तार और हवा के रुख का पता लगाने के लिए भी दो उपकरण लगे हुए हैं।
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कागज जलने पर पता चलता है धूप का: मौसम विभाग की ओर से एक स्पेशल गोलाकार लेंस वाली मशीन भी छत पर लगाई गई है। इसमें एक कागज का चार्ट होता है। दिन में कितने बजे धूप तेज निकली, कितने बजे नहीं निकली, इसकी पूरी जानकारी इस चार्ट के माध्यम से मिलती है। धूप निकलने पर उसी हिसाब से लैंस से होकर गुजरने वाली किरणें इस कागज को जला देती हैं। जहां से कागज जलता है, उसी हिसाब से धूप और इसकी गर्मी का अंदाजा लगता है।
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पलक झपकते ही पहुंच जाता है आंकड़ा: इनवेंट्री में दून का मौसम भले ही मैन्युअल जांचा जाता हो, लेकिन केंद्रीय मौसम विभाग की ओर से इस इनवेंट्री में एक आटोमेटिक रीडिंग मशीन भी लगाई गई है। इस मशीन से बारिश होते ही पूरा आंकड़ा सीधे मौसम विभाग के पुणे और दिल्ली स्थित दफ्तर को पहुंच जाता है। इससे पूरे देश के भविष्य के मौसम का अंदाजा लगाया जाता है।
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चाबी की मशीनें बताती हैं मौसम का हाल: इनवेंट्री में एक बड़ा बॉक्स रखा है। इस बॉक्स में दो चाबी से चलने वाली मशीनें रखी हैं। पहली मशीन को ‘सेल्फ रिकॉर्डिंग थर्मोग्राफ’ कहते हैं, जिसमें लगातार गिरते-चढ़ते पारे का ग्राफ बनता है। यह मशीन चाबी से चलती है। सप्ताह में एक बार इसमें चाबी भरी जाती है। मेहनत केवल इतनी कि इसकी नोक पर स्याही वाली निब लगी है, जिस पर लगातार स्याही लगानी पड़ती है। इसी प्रकार, उमस मापने के लिए भी यहां सेल्फ रिकॉर्डिंग हाइग्रोग्राफिक मशीन लगी है। हालांकि तापमान मापने के लिए दूसरे बॉक्स में तीन थर्मामीटर भी लगे हुए हैं।
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अंग्रेज ऐसे जानते थे मौसम का हाल: अंग्रेजों के जमाने में भी इसी जगह इनवेंट्री हुआ करती थी। उस वक्त तकनीक से लैस मशीनें नहीं थी। लिहाजा अंग्रेजों ने मौसम का हाल जानने के अपने उपकरण बनाए हुए थे। ऐसा ही एक गोलाकार उपकरण इस इनवेंट्री की बगल में लगा हुआ है। इस पर ताम्रपत्र लगाकर मौसम का हाल जाना जाता था। (स्टोरीः आफताब अजमत)