विश्व प्रसिद्ध कैलास-मानसरोवर यात्रा 1981 से शुरू हुई। यह यात्रा अपने धार्मिक महत्व के लिए दुनियाभर में जानी जाती है। कैलास मानसरोवर यात्रा अपने आप में कई रहस्य समेटे हुए है। कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग भारत और चीन से होकर गुजरता है।
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छोटा कैलास
- फोटो : अमर उजाला
कैलास क्षेत्र को स्वंभू कहा गया है। वैज्ञानिक मानते हैं कि भारतीय उपमहाद्वीप के चारों और पहले समुद्र था। इसके रूस से टकराने से हिमालय का निर्माण हुआ। यहां जाने वाले लोगों का कहना है कि इस अलौकिक जगह पर प्रकाश तरंगों और ध्वनि तरंगों का समागम होता है, जिससे 'ऊं' की आवाज आती है। कैलास पर्वत के दक्षिण भाग को नीलम, पूर्व भाग को क्रिस्टल, पश्चिम को रूबी और उत्तर को स्वर्ण रूप में माना जाता है।
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कैलास मानसरोवर
- फोटो : file photo
कैलास मानसरोवर कई धर्मों- तिब्बती बौद्ध, सभी देशों के बौद्ध धर्म, जैन धर्म और हिन्दूओं का आध्यात्मिक केन्द्र है। तिब्बतियों की मान्यता है कि वहां के एक संत कवि ने वर्षों गुफा में रहकर तपस्या की थी। कैलास पर स्थित बुद्ध भगवान का अलौकिक रूप ‘डेमचौक’ बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए पूजनीय है। जैनियों का मानना है कि आदिनाथ ऋषभदेव का यह निर्वाण स्थल 'अष्टपद' है।
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कैलास मानसरोवर
- फोटो : file photo
हिन्दू धर्म के अनुयायियों की मान्यता है कि कैलास पर्वत मेरू पर्वत है जो ब्राह्मंड की धूरी है और यह भगवान शंकर का प्रमुख निवास स्थान है। यहां देवी सती के शरीर का दांया हाथ गिरा था। कुछ लोगों का मानना यह भी है कि गुरु नानक देव जी ने भी यहां कुछ दिन रुककर ध्यान किया था। इसलिए सिखों के लिए भी यह पवित्र स्थान है।
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कैलाश मानसरोवर यात्रा
- फोटो : फाइल फोटो
एक अन्य पौराणिक मान्यता के अनुसार यह जगह कुबेर की नगरी है। यहीं से महाविष्णु के करकमलों से निकलकर गंगा कैलास पर्वत की चोटी पर गिरती है, जहां प्रभु शिव उन्हें अपनी जटाओं में भरकर धरती में निर्मल धारा के रूप में प्रवाहित करते हैं।
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कैलास मानसरोवर
- फोटो : file photo
मानसरोवर पहाड़ों से घीरी झील है जो पुराणों में 'क्षीर सागर' के नाम से वर्णित है। क्षीर सागर कैलाश से 40 किमी की दूरी पर है। यह क्षिर सागर विष्णु का अस्थायी निवास है, जबकि हिन्द महासागर स्थायी।
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कैलास यात्री
- फोटो : अमर उजाला
ऐसा माना जाता है कि महाराज मानधाता ने मानसरोवर झील की खोज की और कई वर्षों तक इसके किनारे तपस्या की थी, जो कि इन पर्वतों की तलहटी में स्थित है। बौद्ध धर्मावलंबियों का मानना है कि इसके केंद्र में एक वृक्ष है, जिसके फलों के चिकित्सकीय गुण सभी प्रकार के शारीरिक व मानसिक रोगों का उपचार करने में सक्षम हैं।
कैलास यात्रियों का प्रथम दल तिब्बत पहुंचा
- फोटो : अमर उजाला
कैलास पर्वत की चार दिशाओं से चार नदियों का उद्गम हुआ है- ब्रह्मपुत्र, सिंधू, सतलज व करनाली। इन नदियों से ही गंगा, सरस्वती सहित चीन की अन्य नदियां भी निकली हैं।