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Operation Silkyara: उम्मीद में बीता 12वां दिन...सूरज चढ़ता गया, इंतजार बढ़ता गया, सुरंग पर लगी रहीं निगाहें

Thu, 23 Nov 2023 06:53 PM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तरकाशी
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उत्तरकाशी सुरंग हादसे को लेकर बचाव अभियान - फोटो : अमर उजाला
सिलक्यारा सुरंग के भीतर फंसे 41 मजदूरों को बाहर निकालने का उत्साह बृहस्पतिवार को दिनभर उतार चढ़ाव लेता रहा। सूरज चढ़ता गया और अड़चनों की वजह से मजदूरों के बाहर आने का इंतजार बढ़ता रहा। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय में राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी देर शाम तक ऑपरेशन सिलक्यारा के सफल होने का इंतजार कर रहे थे।

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बुधवार की रात को चले अभियान के दौरान ऑगर मशीन के सामने सरिया आ गया। जिसे काटने में ही घटों बीत गए, ये कटे तो मशीन का बेस हिलने से काम बाधित हो गया। देर शाम अफसरों ने बताया कि अब दोबारा ड्रिलिंग शुक्रवार सुबह ही शुरू होगी, वहीं ये भी चर्चाएं रहीं कि सुबह तक मजदूरों को निकाल लिया जाएगा।
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सुरंग में बचाव अभियान - फोटो : अमर उजाला
ऑगर ड्रिल मशीन की राह में लोहे के सरिये व गाटर आने पर मशीन का पुर्जा भी टूट गया। जिससे मशीन रोकनी पड़ी। इसके बाद एनडीआरएफ के जवान ने करीब 40 मीटर तक पहुंचे 800 मिमी पाइप के भीतर घुसकर रुकावट को देखा। इसे काटने के लिए गैस कटर मंगाया गया। भीतर ऑक्सीजन कम होती है, गैस कटर चलाने पर यह और कम हो जाती है।
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सुरंग में बचाव अभियान - फोटो : अमर उजाला
लिहाजा, पहली टीम इसे नहीं काट पाई। इसके बाद दूसरी टीम भीतर गई, जिसे कई घंटों की मशक्कत के बाद सफलता मिली। बृहस्पतिवार सुबह दोबारा ड्रिल मशीन शुरू कर दी गई। नौवां पाइप भीतर भेजना शुरू किया। करीब 1.8 मीटर पाइप पहुंचा ही था कि मशीन में फिर तेज कंपन्न होने लगा।

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सुरंग में बचाव अभियान के दौरान जवान - फोटो : अमर उजाला
सामने फिर सरिया आ गया, जिसे देर शाम तक काटा गया। इस दौरान ऑगर मशीन का बेस हिल गया, समाचार लिखे जाने तक इसे ठीक किया जा रहा था। रात करीब आठ बजे सचिव नीरज खेरवाल ने बताया कि शुक्रवार सुबह छह बजे दोबारा ड्रिलिंग शुरू की जाएगी। वहीं, ये भी चर्चाए रहीं कि सुबह तक मजदूरों को निकाल लिया जाएगा।
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वहीं, बचाव अभियान का निरीक्षण करने के लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय में राज्य मंत्री जनरल (सेनि.) वीके सिंह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी पहुंचे। निरीक्षण के बाद केंद्रीय मंत्री वीके सिंह जहां टनल से पहले बने कार्यालय में बैठ गए तो मुख्यमंत्री ने भी उत्तरकाशी के निकट स्थित मातली में डेरा डाल लिया। दिनभर दोनों नेता मजदूरों के सकुशल बाहर आने का इंतजार करते रहे।
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