सुरंग से बाहर लाए गए श्रमिक
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उन्होंने बताया कि रेस्क्यू के यह 17 दिन उनके लिए बेहद मुश्किल रहे। हर दिन उम्मीद के साथ शुरू होता, लेकिन रात-होते-होते हताशा घेर लेती, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। बताया कि वह यहां भाई को लेने आए थे, उन्हें साथ लेकर ही जाएंगे।