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आंखों में उम्मीद और जुबां पर दुआ: सुरंग पर टकटकी लगाए देखते रहे लोग, मजदूरों को देख नम हुईं आंखें, तस्वीरें

Tue, 28 Nov 2023 10:14 PM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तरकाशी
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सुरंग के बाहर बैठे परिजन - फोटो : अमर उजाला
ऑपरेशन सिलक्यारा में जुटे राहत एवं बचाव दलों के लिए मंगलवार की सुबह से ही मंगलकारी सूचनाएं आने लगीं। जैसे-जैसे सूरज चढ़ता गया, ऑपरेशन की सफलता से संबंधित सूचनाएं भी आगे बढ़ती गईं।

लोग टकटकी लगाए सुरंग की तरफ ही देखते रहे। उम्मीद और आस में लोगों का दिन बीत गया। शाम को जब मजदूर बाहर आए तो उनकी खुशी का ठिकाना न रहा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी दिनभर सिलक्यारा सुरंग स्थल पर मौजूद रहे।

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सुबह आठ बजे से मिलने वाली शुभ सूचनाएं धीरे-धीरे खुशी में बदलती दिखी। दोपहर करीब दो बजे जैसे ही मजदूरों ने भीतर पाइप पहुंचने की पुष्टि की तो सबकी खुशी का ठिकाना न रहा। 
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सुरंग के बाहर बैठे परिजन - फोटो : अमर उजाला
पिछले 17 दिनों से सिलक्यारा सुरंग में फंसे मजदूरों के परिजनों के लिए ये दिन बेहद हताशा व उम्मीदों भरे रहे। वह सुबह से शाम तक सुरंग की ओर टकटकी लगाए अपनों का इंतजार करते थे।
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सुरंग के बाहर बैठे परिजन - फोटो : अमर उजाला
हालांकि, पहले पाइपलाइन और बाद में ऑडियो सिस्टम से अंदर बातचीत कर उन्हें अपनों की सलामती की खबर मिलती रही। यही कुछ पलों की बात उन्हें इन मुश्किल समय में हिम्मत देती थी।

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सुरंग के बाहर बैठे परिजन - फोटो : अमर उजाला
12 नवंबर को हुए हादसे के बाद धीरे-धीरे अंदर फंसे मजदूराें के परिजनों के सिलक्यारा पहुंचने का सिलसिला शुरू हुआ था। जिनकी पाइपलाइन व वॉकी-टॉकी से सुरंग के अंदर फंसे उनके अपनों से बात करवाई जाती थी।
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सुरंग के बाहर बैठे परिजन - फोटो : अमर उजाला
इस दौरान कई बार ऐसी उम्मीद बंधी कि रेस्क्यू ऑपरेशन आज खत्म हो जाएगा। इस उम्मीद वह परिजन सुबह ही सिलक्यारा सुरंग के बाहर पहुंच जाते थे, लेकिन शाम होते-होते उनकी उम्मीद टूट जाती थी। सुरंग में फंसे झारखंड के ग्राम केशोहीह निवासी विश्वजीत के भाई इंद्रजीत हर दिन सुरंग के बाहर पहुंचकर अपने भाई का इंतजार करते थे।
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सुरंग से बाहर लाए गए श्रमिक - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि रेस्क्यू के यह 17 दिन उनके लिए बेहद मुश्किल रहे। हर दिन उम्मीद के साथ शुरू होता, लेकिन रात-होते-होते हताशा घेर लेती, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। बताया कि वह यहां भाई को लेने आए थे, उन्हें साथ लेकर ही जाएंगे।
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