सावन के सोमवार पर शिवालयों में भक्त
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सूर्य के प्रतिमास नई राशि में प्रवेश करने से सौरमास की गणना की जाती है। चंद्रमास का आरंभ कृष्ण पक्ष से शुक्ल पक्ष तक रहता है। अत: सौर और चंद्र दोनों कैलेंडर की गणना में कुछ अंतर है, इसलिए पर्वतीय इलाकों में सौरमास से पर्व मनाए जाते हैं।