जवान बेटे की पार्थिव देह घर के आंगन में पहुंची तो हर आंख नम थी और हर शख्स शहीद की एक झलक पाने को बेकरार था। बेटे बृजेश की मौत की खबर से सुधबुध खो बैठी मां सच मानने के लिए तैयार नहीं थी। पर नियति तो अपना खेल खेल चुकी थी।
जिगर के टुकड़े की पार्थिव देह देखकर मां पुष्पा देवी, बहन कल्पना का रो रोकर बुरा हाल था। वह बेटे से लिपटती और फिर बेहोश हो जाती। यह मंजर देखकर वहां मौजूद सैकड़ों महिलाओं, पुरुषों की आंखें भी नम हो गईं। हर कोई इस हृदयविदारक घटना से दुखी था। पिता दलवीर और बड़ा भाई अमित भी गमगीन थे। छोटे भाई की देह देख अमित की आंखें भी नम हो गईं। सैन्य अधिकारियों ने उन्हें भी ढांढस बंधाया।
उत्तराखंड में रानीखेत के बेटे ने देश की सेवा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया। पर मां तो मां है, आखिर वह कैसे मान ले कि जिस बेटे को उसने नौ माह पेट में पाला, फिर अपनी गोद में खिलाया और पाल पोसकर बड़ा किया अब वह नहीं रहा। मां बस रो रोकर यही करती रही, छुट्टी पर जब भी घर आता था तो गोद में उठा लेता था। लेकिन आज वही लाल घर के आंगन में बेजान पड़ा था। मां-पिता सहित अन्य परिजनों का करुण रुदन से हर शख्स भावुक था।