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उत्तराखंड: पिथौरागढ़ में बारिश के बाद पुल बहे, जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे लोग, तस्वीरें...

Tue, 13 Jul 2021 08:50 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धारचूला (पिथौरागढ़)
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पुल बहने के बाद लकड़ी और रस्सी के सहारे आवाजाही कर रहे लोग - फोटो : अमर उजाला
उत्तराखंड में पिथौरागढ़ के कुलागाड़ में पुल बहने के बाद से लोग जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने के लिए मजबूर हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्र में बंद पड़ी सड़कों को खोलने के लिए डोजर चलाने के लिए भी केन से डीजल भेजा जा रहा है।

भारतीय सेना के घोड़ों के लिए भूसा रस्सी के सहारे पार कर पहुंचाया जा रहा है। तल्ला, मल्ला दारमा, तल्ला, मल्ला चौंदास और व्यास घाटी के 60 से अधिक गांवों के लोगों को भारी मुसीबत झेलनी पड़ रही है। पर्वतारोहण के क्षेत्र में कार्य करने वाली संस्था सीबीटीएस अस्थायी पुल से आवाजाही में लोगों की मदद कर रही है।  

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पांच दिन पूर्व उच्च हिमालयी क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण कुलागाड़ का जलस्तर बढ़ गया था। इस कारण बीआरओ का सीसी पुल बहकर काली नदी में समा गया था। यहां पर एसएसबी, ग्रिफ और भारतीय सेना की टीम ने बिजली के खंभे डालकर अस्थायी आवाजाही के लिए पुल बनाया था। दो दिन पूर्व कुलागाड़ का जलस्तर बढ़ने के कारण वह भी बह गया। इसके बाद दूसरी जगह अस्थायी पुल बनाया गया है।

आवाजाही के दौरान लोगों को कोई दिक्कत न हो इसके लिए पवर्तरोहण के क्षेत्र में काम करने वाली सीबीटीएच संस्था लोगों को अस्थायी पुल से आर-पार जाने में मदद कर रही है। मंगलवार को संस्था ने एक हजार लोगों को सुरक्षित नाला पार कराया। 
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पुल बहने के बाद लकड़ी और रस्सी के सहारे आवाजाही कर रहे लोग - फोटो : अमर उजाला
कुलागड़ में पुल बहने के कारण सीमांत के 60 से अधिक गांवों का देश दुनिया से संपर्क कट गया है। कुलागाड़ में प्रशासन की ओर से किसी भी कर्मी को तैनात नहीं करने पर लोगों ने नाराजगी प्रकट की है। इधर, लोगों को पैदल आवाजाही में दिक्कत ना हो इसके लिए लोनिवि के ठेकेदार रास्ते में सीढ़ी का निर्माण कर रहे हैं। ग्रिफ के उच्च अधिकारियों का कहना है कि कुलागाड़ में बेली ब्रिज के निर्माण के लिए सामान पहुंच गया है। एक सप्ताह के भीतर पुल का निर्माण पूरा कर लिया जाएगा।
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पुल बहने के बाद तेल लेजाते लोग - फोटो : अमर उजाला
सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण चीन सीमा को जोड़ने वाली सड़क पर कुलागाड़ में पुल बहने से सर्वाधिक दिक्कतें सुरक्षा एजेंसियों को हो रही हैं। किसी तरह उच्च हिमालयी क्षेत्रों की पोस्टों में सामान पहुंचाया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों को सूचनाओं के आदान-प्रदान में भी काफी दिक्कतें हो रही हैं। 

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पुल बहने के बाद रस्सी के सहारे जाते लोग - फोटो : अमर उजाला
कुलागाड़ में पहाड़ी जायका की टीम भागीरथी ह्यांकी और उर्मिला गुंज्याल के नेतृत्व में नराहत-बचाव कार्य में लगी हुई टीम को भोजन करा रही है।  सीमांत जिले के विभिन्न हिस्सों में लगातार हो रही बारिश के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। चीन सीमा को जोड़ने वाली तीन और ग्रामीण क्षेत्र की नौ सड़कें बंद हैं। नदियां और गाड़-गधेरे भी उफान पर हैं। इसके चलते ग्रामीणों को आवागमन में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। 
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पुल बहने के बाद रस्सी के सहारे जाते लोग - फोटो : अमर उजाला
चीन सीमा को जोड़ने वाली सोबला-दर-तिदांग, तवाघाट-सोबला, पिथौरागढ़-तवाघाट सड़क कई दिनों से बंद है। इस कारण चीन सीमा से संपर्क पूरी तरह कटा हुआ है। कार्यदायी संस्थाएं बीआरओ और सीपीडब्ल्यूडी बंद सड़कों को खोलने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन भारी बारिश के कारण उनको सड़क खोलने में दिक्कत हो रही है।
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पुल बहने के बाद रस्सी के सहारे जाते लोग - फोटो : अमर उजाला
मलबे के कारण ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने वाली सिमली-बिसनी, सेला, नागलिंग, बांस-आंवलाघाट, कुसेरीबैंड-सिलौनी, बांसबगड़-गूंठी, आदिचौरा-सिन्नी, मंसूरीकांडा-होकरा, स्यांकुरी-धामीगांव, छिरकिला-जम्कू सड़क भी बंद हैं। इस कारण ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरी सामान की दिक्कत होने लगी है। लोगों ने शीघ्र सड़कों को खोलने की मांग की है। 
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