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घर पहुंचा शहीद शंकर का तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर, अंतिम विदाई में फूट-फूट कर रोया पूरा गांव, तस्वीरें...

Sun, 03 May 2020 05:43 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पिथौरागढ़
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- फोटो : अमर उजाला
शुक्रवार को बारामुला के उड़ी में आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए उत्तराखंड के लाल 21 कुमाऊं रेजीमेंट में तैनात गंगोलीहाट ब्लॉक के नाली गांव निवासी नायक शंकर सिंह (31)  का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा। इस दौरान जवान को तिरंगे में लिपटा देखक पूरा गांव फूट-फूट कर रोया। वहीं, भारत माता की जय के नारे भी लगे।
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- फोटो : अमर उजाला
शहीद शंकर सिंह के माता-पिता, पत्नी और छह साल का बेटा नाली गांव में रहते हैं। शंकर की शहादत की खबर सुनने के बाद से परिजन बदहवास हैं। शनिवार को शहीद के पार्थिव शरीर को हेलीकॉप्टर से गंगोलीहाट तहसील के दसाईथल हेलीपैड पर लाया गया। इसके बाद यहां उनके पैतृक गांव ले जाया गया। शाम को शहीद का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान सभी लोगों की आंखें नम हो गई।
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- फोटो : अमर उजाला
शंकर सिंह के शहीद होने की खबर मिलने के बाद से ही जहां माता-पिता, पत्नी सहित अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं शहीद का मासूम बेटा हर्षित अपने पिता की शहादत से अंजान है। उसे यह भी पता नहीं कि अब उसके सिर पर पिता का साया नहीं रहा।

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- फोटो : अमर उजाला
सीमा की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले शंकर सिंह का परिवार सैन्य पृष्ठभूमि का है। शहीद शंकर सिंह के दादा भवान सिंह ने द्वितीय विश्व युद्ध लड़ा था। शंकर सिंह के पिता ने भी सेना को ही चुना और राष्ट्रीय राइफल में भर्ती हुए। देश सेवा के बाद उन्होंने वर्ष 1995 में सेवानिवृत्ति ली।
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- फोटो : अमर उजाला
पिता और दादा के नक्शेकदम पर शंकर सिंह और उनके छोटे भाई नवीन सिंह ने भी देश सेवा को ही लक्ष्य बनाया। शंकर सिंह के छोटे भाई नवीन सिंह सात कुमाऊं में जम्मू-कश्मीर में तैनात हैं।
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शहीद शंकर सिंह जनवरी में छुट्टी पर घर आए थे। एक माह की छुट्टी पूरी करने के बाद ही फरवरी में यूनिट लौट गए थे। इससे पहले वह महाकाली मंदिर में सेना की ओर से किए गए धर्मशाला के निर्माण के दौरान भी आए थे।
 
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