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आठ महीने बाद घर पहुंचा पाक सीमा से लापता जवान का पार्थिव शरीर, सामने देख ही पत्नी ने माना शहीद

Thu, 20 Aug 2020 09:52 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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- फोटो : अमर उजाला
आठ महीने पहले पाक सीमा से लापता उत्तराखंड के शहीद जवान हवलदार राजेंद्र सिंह नेगी का पार्थिव शरीर बृहस्पतिवार को सैन्य अस्पताल से उनके आवास अंबीवाला लाया गया तो अंतिम दर्शन के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। परिजनों का रो रोकर बुरा हाल था। लापता होने के बाद से परिजन हवलदार राजेंद्र सिंह नेगी के लौटने का इंतजार कर रहे थे। 
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- फोटो : अमर उजाला
पत्नी राजेश्वरी नेगी को अनहोनी की आशंका तो थी लेकिन उम्मीद भी थी कि उनके पति लौटकर जरूर आएंगे। लापता के बाद से जब भी उनके घर फोन की घंटी बजती थी तो उन्हें उनके लौटने की उम्मीद की किरण दिखाई देती थी, लेकिन जब सेना की ओर से कहा जाता था कि उनका कहीं पता नहीं चला तो फिर पूरा परिवार मायूस हो जाता। 
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- फोटो : अमर उजाला
छह माह तक जब राजेंद्र सिंह नेगी का पता नहीं चला तो सेना ने उन्हें शहीद घोषित कर दिया। लेकिन, पत्नी राजेश्वरी नेगी ने उम्मीद नहीं छोड़ी थी। उन्हें उम्मीद थी कि पति एक दिन लौटकर जरूर आएंगे, चाहे तिरंगे में ही लिपटकर आएं। यही वजह थी कि शहीद घोषित के बाद भी पत्नी ने पति को शहीद मानने से इंकार कर दिया था। 

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- फोटो : अमर उजाला
बृहस्पतिवार को जब तिरंगे में लिपटकर उनका पार्थिव शरीर आवास लाया गया तो पत्नी ने माना कि उनके पति शहीद हो गए हैं। इस दौरान उन्होंने गुस्से में सेना को कहे शब्दों के लिए भी विनम्रता से माफी मांगी। 
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- फोटो : अमर उजाला
पार्थिव शरीर जब अंतिम संस्कार के लिए हरिद्वार के लिए रवाना हुआ तो लोगों ने ‘शहीद राजेंद्र सिंह अमर रहे’, ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, राजेंद्र तेरा नाम रहेगा’ जैसे नारों के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी।
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- फोटो : अमर उजाला
पत्नी राजेश्वरी देवी समेत अन्य परिजन फूट-फूट कर रोने लगे।  इस दौरान मुख्यमंत्री ने शहीद के पिता रतन सिंह नेगी, पत्नी राजेश्वरी नेगी और बच्चों से मिलकर उन्हें सांत्वना दी। उनके बेटे प्रियांशु ने शहीद पिता को मुखाग्नि दी।
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