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उत्तराखंड स्थापना दिवस 2023: अलग-अलग थीम पर निकाली गई भव्य झांकियां, केक काटकर मनाया गया जश्न, देखें तस्वीरें

Thu, 09 Nov 2023 03:02 PM IST
रेनू सकलानी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
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पुलिस लाइन में राष्ट्रपति को सलामी देते जवान। - फोटो : amar ujala
उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर राजधानी की पुलिस लाइन में भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। बतौर मुख्य अतिथि महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू कार्यक्रम में शामिल हुई। वहीं दूसरी तरफ प्रदेश भर में जगह-जगह रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। लोगों ने केक काटकर खुशी मनाई।
 
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सबसे पहले देहरादून शहीद स्मारक पहुंचकर शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इसके बाद वह भी पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मौजूदगी में जवानों में शानदार परेड निकाली। इस दौरान अलग-अलग थीम पर आधारित झांकियों ने मन मोहा।

पारंपरिक संगीत और लोकनृत्य ने कार्यक्रम में समा बांधा। मुख्यमंत्री धामी ने कहा, मैं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सामने एक सुंदर परेड का प्रदर्शन करने के लिए जवानों को बधाई देना चाहता हूं...मैं आज की मुख्य अतिथि और भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का हृदय की गहराइयों से स्वागत और अभिनंदन करता हूं।
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू - फोटो : amar ujala
राज्य स्थापना दिवस पर बतौर मुख्य अतिथि कार्यक्रम में शामिल हुईं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि अपनी अलग पहचान स्थापित करने और अपने विकास का रास्ता तय करने का उत्तराखंड के निवासियों का सपना आज ही के दिन पूरा हुआ था।
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू - फोटो : amar ujala
कहा कि यह प्रसन्नता की बात है कि नई पहचान के साथ उत्तराखंड के परिश्रमी लोगों ने राज्य के लिए विकास और प्रगति के नित-नूतन शिखरों पर अपने कदम जमाए हैं। 

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू - फोटो : amar ujala
राष्ट्रपति ने कहा कि भगवान शिव और भगवान विष्णु के आशीर्वाद-स्वरूप देवालयों से पवित्र उत्तराखंड को ‘देव-भूमि’ कहने की परंपरा वंदनीय है। साथ ही, पर्वतराज हिमालय की पुत्री देवी पार्वती एवं शक्ति के अन्य पूजनीय स्वरूपों से ऊर्जा प्राप्त करने वाली व गंगा-यमुना जैसी नदी-माताओं के स्नेह से सिंचित यह पावन धरती ‘देवी-भूमि’ भी है।
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लोगों ने केक काटकर मनाई खुशी। - फोटो : amar ujala
यह क्षेत्र ‘जय महा-काली’ और ‘जय बदरी-विशाल’ के पवित्र उद्घोष से गुंजायमान रहता है। हेमकुंड साहिब और नानक-मत्ता से निकले गुरबानी के स्वर यहां के वातावरण को पावन बनाते हैं।  

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स्थापना दिवस का जश्न - फोटो : amar ujala
बताया कि पिछले वर्ष दिसंबर के महीने में मुझे उत्तराखंड की यात्रा करने का सुअवसर मिला था। उत्तराखंड में आने का प्रत्येक अवसर तीर्थ-यात्रा का पुण्य प्राप्त करने की तरह होता है।
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