सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत
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अंत में उन्होंने अपना भाषण मंजिलें भी जिद्दी हैं, रास्ते भी जिद्दी हैं, देखते हैं कल क्या हो, हौसले भी जिद्दी हैं कविता से संपन्न किया। लेकिन मुख्यमंत्री की भाव भंगिमा बता रही थीं कि उनके पिटारे में और भी सौगातें हैं।