आचार्य बाल कृष्ण के जन्मदिन के आपको आचार्य बाल कृष्ण के कुछ ऐसे राज बताने जा रहे हैं जो आपके जीवन में प्रेरणा भर देंगे। आधुनिकता के इस दौर में आचार्य बालकृष्ण ने आयुर्वेद और हरबल को ऐसे ही नया आयाम नहीं दिया है। अपने कठिन परिश्रम, संघर्ष और अलग वर्किंग स्टाइल से आज वह देश की चर्चित हस्तियों में शामिल हैं।
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Balkrishna
- फोटो : amarujala
करीब 10 साल पहले पर्सनल लोन लेकर यात्रा शुरू करने वाले बालकृष्ण ने कभी सोचा नहीं था कि पतंजलि इतना लंबा सफर तय कर सकेगी। बालकृष्ण ने करीब 50 से 60 करोड़ रुपये का पर्सनल लोन लिया था, जबकि बैंक में उनका कोई अकाउंट नहीं था।
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बाबा रामदेव के अनुयायी एनआरआई दंपती सुनीता और सरवन पोद्दार ने बालकृष्ण को कारोबार की शुरुआत करने लिए यह लोन दिया था। इस दंपती से लिए गए कर्ज को कंपनी वापस कर चुकी है, लेकिन अब भी कंपनी के शेयरों में उनकी 3 पर्सेंट हिस्सेदारी है।
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acharya balkrishna
पतंजलि आयुर्वेद आज देश और दुनियाभर की एक जानीमानी संस्था है। इसकी सफलता के पीछे आचार्य बालकृष्ण का हाथ है। बालकृष्ण ने कंपनी को बहुत ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। पतंलजि आयुर्वेद का वर्क कल्चर एकदम अलग है। यहां हर कोई ओम का उच्चारण कर एक-दूसरे का अभिवादन करता है। इसके साथ ही यहां मांस खाने, शराब पीने और धूम्रपान करना प्रतिबंधित है।
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बालकृष्ण आईफोन का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन उनके वर्कस्टेशन पर कंप्यूटर नहीं है। धोती और कुर्ते में रहने वाले बालकृष्ण अपनी डेस्क पर प्रिंट डॉक्यूमेंट्स पढ़ना ज्यादा पसंद करते हैं। आचार्य शुद्ध हिंदी में बात करते हैं। बाबा रामदेव के भरोसेमंद बालकृष्ण की पतंजलि आयुर्वेद में 94 पर्सेंट की हिस्सेदारी है। वह कंपनी से कोई सैलरी नहीं लेते। साल के हर दिन वह काम करते हैं। वह 15 घंटे काम करते हैं।
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बालकृष्ण प्रतिदिन सुबह 7 बजे से रात को 10 बजे तक काम करते हैं। वह दिन में 8 घंटे ही काम करता है, लेकिन सप्ताह के हर दिन 15 घंटे काम करते हैं। आचार्य बालकृष्ण को योग और आयुर्वेद के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए कई बार सम्मानित किया गया। बालकृष्ण को 23 अक्टूबर 2004 को एक योग शिविर के दौरान राष्ट्रपति भवन में भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ अब्दुल कलाम के द्वारा सम्मान दिया गया।
अक्टूबर 2007 में नेपाल के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और कैबिनेट मंत्रियों की उपस्थिति में योग, आयुर्वेद, संस्कृति और हिमालयी जड़ी बूटी के छिपे ज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान के लिए उनके योगदान के लिए सम्मान प्रदान किया गया। 2013 में योग और औषधीय पौधों के क्षेत्र में शानदार योगदान के लिए श्री वीरंजनया फाउंडेशन द्वारा "सुजाना श्री 'पुरस्कार प्रदान किया गया।