सरकारी नौकरियों के सौदागर हाकम सिंह रावत ने हरिद्वार से इस धंधे का ककहरा सीखा था। इस धंधे से वह अकूत संपत्ति बना चुका है। पैसा कमाने के लिए उसने सत्ता की सीढ़ियों का भी खूब इस्तेमाल किया। वह लगातार कद्दावर नेताओं के दरबार में हाजिरी लगाता था।
हाकम सिंह रावत एक समय वह पैसों की तंगी से जूझ रहा था। वह किसी के माध्यम से उत्तरकाशी के एक प्रशासनिक अधिकारी के घर कुक का काम करने लगा। कुछ दिनों बाद उस अधिकारी का ट्रांसफर हरिद्वार हुआ तो वह हाकम सिंह को भी अपने साथ ले गए। यहां वह अधिकारी का प्राइवेट ड्राइवर बन गया। हरिद्वार में वह कुछ प्रभावशाली लोगों के संपर्क में आया और उसे पेपर लीक कराने के धंधे का पता चला।
धीरे-धीरे वह अपनी पैठ रसूखदार लोगों में बनाता रहा। उसके कई अधिकारियों से ऐसे संपर्क हुए कि वे उसे घर का सदस्य मानने लगे। वर्ष 2008 में वह पंचायत की राजनीति में सक्रिय हो गया। उसने बड़े-बड़े लोगों के साथ फोटो खिंचवाने को अपनी रणनीति का हिस्सा बना लिया। इससे उसकी जानपहचान और बढ़ती गई।