देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह दो हजार छात्रों को डिग्री सौंपी गई। दीक्षांत समारोह में राज्यपाल केके पॉल, नोबल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी एवं देसंविवि के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पंड्या मौजूद रहे।
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इस मौके पर मुख्य अतिथि एवं नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि वह पहली बार किसी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि देवभूमि में आपदा के समय शांतिकुंज ने मानवता को स्थान दिया। आपदा से पीड़ित लोगों को शरण देना और रक्षा करना देवत्व है।
राज्यपाल केके पाल ने कहा यहां शिक्षा में आधुनिकता और भारतीय संस्कृति का समागम है, जो अनूठी परंपरा है। कहा कि कैलाश सत्यार्थी जैसे व्यकित्व के साथ बैठना हमारा गौरव है। साथ ही उन्होंने छात्रों से कहा कि जीवन में परीक्षा का क्रम हमेशा जारी रहेगा। भविष्य में नौकरी या रोजगार की चिंता सताएगी, लेकिन केवल नौकरी के लिए अपनी जन्मभूमि से पलायन न करें। साथ ही इसके बारे में शिक्षण संस्थाओं को भी सोचना होगा।
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उन्होंने कहा कि कहा तकनीकी तेज गति से बदल रही है। यह चुनौती है। साथ ही नए अवसर भी बढ़ते हैं। ऐसे में प्रासंगिक रहने के लिए अपने ज्ञान को बढ़ाने के लिए निरंतर अध्ययन जरूरी है।
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आगे बढ़ने के लिए अपने प्रतिस्पर्धी से भी सीखें। आज ऐसे शिक्षण संस्थाओं की जरूरत है, जहां शिक्षा के साथ संस्कार और परंपराओं की भी रक्षा हो।कुलाधिपति डाक्टर प्रणव पंड्या ने सभी सम्मानित छात्र छात्राओं को अनुशासन की दीक्षा दी।
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उन्होंने कहा कि कहा गंगा के पावन तट पर बसा यह विश्वविद्यालय पूरे विश्व में अपनी पताका फहरा रहा है। आने वाले दिनों में इस विश्वविद्यालय में जल्द ही नालंदा और तक्षशीला विश्वविद्यालय की तर्ज पर भी शिक्षा दी जाएगी।
कैलाश सत्यार्थी ने डिग्री धारकों से कहा कि आज से आपका लौटाने का दिन शुरू हो जाता है। अपने प्रति जिम्मेदारी के साथ- साथ परिवारिक, सामाजिक और राष्ट्र के प्रति दायित्वों का निर्वहन करें। आज सांप्रदायिकता, जात-पात, भ्रष्टाचार, ग्लोबल वॉर्मिंग, आतंकवाद जैसी चुनौतियां पूरे विश्व के सामने हैं।