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चल रहा था सर्वे का काम, तभी मिली कत्यूरी शासनकाल में बनी सुरंग, तस्वीरों में देखिए...

Wed, 28 Aug 2019 05:05 PM IST
अलका त्यागी दीप जोशी, अमर उजाला, अल्मोड़ा
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अल्मोड़ा में मिली सुरंग - फोटो : अमर उजाला
उत्तराखंड के अल्मोड़ा में क्षेत्रीय पुरातत्व विभाग की टीम को स्याल्दे ब्लॉक के दूरस्थ एड़ीकोट नामक स्थान पर कत्यूरी शासन काल में बनाई गई करीब आधा किलोमीटर लंबी सुरंग मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि कत्यूरी शासन काल में महत्वपूर्ण रहे इस इलाके में यह सुरंग सुरक्षा व्यवस्था की दृष्टि से बनाई गई होगी। यह सुरंग ऊंचाई वाले एड़ीकोट से आधा किमी दूर खतरौन नदी तक बनी है। 
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अल्मोड़ा में मिली सुरंग - फोटो : अमर उजाला
माना जा रहा है कि कत्यूरी सैनिक इस सुरंग का प्रयोग नदी से पानी ढोने के लिए भी करते होंगे। पुरातत्व विभाग इस सुरंग को संरक्षित करने के लिए भारत सरकार को प्रस्ताव भेज रहा है। साथ ही पर्यटन विभाग को भी सुरंग के बारे में जानकारी दी जाएगी ताकि इसे पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित किया जा सके।   
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अल्मोड़ा में मिली सुरंग - फोटो : अमर उजाला
पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञों का दल पिछले कुछ दिनों से क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. चंद्र सिंह चौहान के नेतृत्व में भिकियासैंण तहसील में व्यापक सर्वेक्षण कार्य कर रहा है। सर्वेक्षण में दो दिन पहले इस दल को स्याल्दे ब्लॉक के अंतर्गत दूरस्थ एड़ीकोट गांव के निकट जंगल के पास एक सुरंग मिली है। टीम ने सुरंग के एक छोर से करीब 20 मीटर भीतर तक जाकर निरीक्षण किया। 

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अल्मोड़ा में मिली सुरंग - फोटो : अमर उजाला
क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. सीएस चौहान ने निरीक्षण के बाद बताया कि करीब आधा किलोमीटर लंबी यह सुरंग एड़ीकोट से खतरौन नदी तक बनी है। पुरातत्व की टीम ने सुरंग के नदी में खुले वाले दूसरे छोर का भी पता लगा लिया है। डॉ. चौहान ने बताया कि यह इलाका कत्यूरी शासनकाल के महत्वपूर्ण स्थलों में रहा है। यहां आसपास कत्यूरी काल के कई मंदिर हैं, जिनमें भरसोली, चम्याड़ी, पितकी, चितेश्वर और तालेश्वर के शिव मंदिर शामिल हैं।  
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अल्मोड़ा में मिली सुरंग - फोटो : अमर उजाला
तत्कालीन शासकों ने संभवत: यह सुरंग सैनिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर तैयार की होगी। क्षेत्र के ग्रामीण सुरंग के बारे में अनभिज्ञ थे। यही वजह है कि वन विभाग और अन्य एजेंसियों के माध्यम से सुरंग के ऊपर जल संरक्षण के लिए चेक डैम और चाल-खाल आदि बना दिए हैं। इससे सुरंग का बड़ा हिस्सा ढका हुआ है और इसमें मलबा भी भर गया है।
- डॉ. चंद्र सिंह चौहान, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी  
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