13 साल की उम्र से वाइल्ड लाइफ प्रेम ने अदिति शर्मा को आदमखोर गुलदार और हाथियों बीच रहने के लिए निडर बना दिया।
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राजाजी टाइगर रिजर्व की 40 वर्षीय डॉक्टर अदिति शर्मा को आदमखोर गुलदार और हाथी से उन्हें बिल्कुल डर नहीं लगता। गुलदार के आबादी क्षेत्र में दस्तक पर जब लोग डरकर घर में बंद हो जाते हैं तो तब अदिति का काम शुरू होता है। वो मात्र 15 मीटर की दूरी पर जाकर गुलदार को ट्रैंकुलाइज करती हैं।
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अदिति बताती हैं कि उस दौरान उन पर लोगों की सुरक्षा के साथ ही वन्य जीवों को सुरक्षित रखने की दोहरी जिम्मेदारी होती है। बुधवार को रायपुर में गुलदार को ट्रैंकुलाइज कर उन्होंने एक बार फिर सैकड़ों लोगों को संकट से उबारा। आदमखोर से निजात दिलाने के बाद उन्हें लोगों का जो प्यार मिलता है, उससे उनका हौसला बढ़ जाता है।
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तेंदुआ
- फोटो : SELF
राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क की डॉ. अदिति बताती हैं कि छोटी उम्र से वे वाइल्ड लाइफ और पशु प्रेमी रही हैं। यही वजह है कि आगे चलकर पशुओं के इलाज को उन्होंने करियर बना लिया। तीन बहनों में सबसे छोटी अदिति के मुताबिक पंतनगर यूनिवर्सिटी से वैटनरी में पीजी करने के बाद वर्ष 2003 में उन्होंने पशुपालन विभाग में पशु चिकित्सक के रूप में काम शुरू कर दिया।
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वर्ष 2014-15 में उन्होंने वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट से पीजी डिप्लोमा किया। उन्हें ऑफिस में बैठकर काम करना पसंद नहीं था। अगस्त 2015 में वे राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क में प्रतिनियुक्ति पर आ गईं। अब तक वो 10 गुलदारों को ट्रैंकुलाइज कर चुकी हैं। अदिति बताती हैं कि दिसंबर 2016 में चंबा (उत्तराखंड) में गुलदार को इमोबलाइज करने के दौरान गुलदार के बार-बार छत पर पंजा मारने की घटना उन्हें आज भी याद है।
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देर शाम सूचना मिली थी कि चंबा में एक गौशाला में गुलदार घुस आया है। स्थानीय लोगों ने उसे गौशाला में बंद किया हुआ है। वे मौके पर पहुंचीं तो देखा कि गुलदार जिस गौशाला में बंद था, उसकी छत और दीवार मिट्टी की बनी हुई थी, जो बहुत कच्ची थी, गुलदार जब भी छत पर पंजा मारता छत से मिट्टी गिरने लगती। उन्होंने दीवार में छेद करके किसी तरह जैबेस्टिक (बेहोशी का इंजेक्शन देने का उपकरण) से टॉप अप (इंजेक्शन) देकर गुलदार को बेहोश किया। यदि गुलदार को जल्द ही बेहोश न किया जाता तो वो पंजा मारकर छत तोड़ सकता था।
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क्षेत्र के लोगों को 48 घंटे की मशक्कत के बाद इस गुलदार से निजात मिली थी। वहीं, 29 दिसंबर 2017 को मोतीचूर में गाड़ी में बैठकर पौने दो घंटे की मशक्कत के बाद दो गुलदारों को ट्रैंकुलाइज किया था। इससे पहले नवंबर 2017 में उन्होंने साउथ अफ्रीका से वाइल्ड लाइफ कैप्चर कोर्स भी किया था। दून के इंदिरा नगर में रहने वालीं अदिति के पति डॉ. प्रदीपचंद शर्मा दून के एक निजी मेडिकल कॉलेज में कार्यरत हैं।
मां की चुनौतियों से मिली आत्मनिर्भर बनने की सीख
वो जब कक्षा आठ में पढ़ती थीं तो तभी पिता विनोद कुमार शर्मा की एक सड़क हादसे में मौत हो गई। मां पुष्पलता शर्मा ने अकेले दम पर तीनों बहनों को पढ़ाया। मां ने जिन चुनौतियों के बीच परिवार को पाला, इससे चुनौतियों का सामना करने और आत्मनिर्भर बनने की सीख मिली।
राजाजी टाइगर रिजर्व के पास डॉ.अदिति के नेतृत्व में दक्ष टीम है, मसूरी, देहरादून वन प्रभाग हो या फिर कोई अन्य वन प्रभाग, जहां से भी सहयोग मांगा जाता है, टीम को मौके पर भेजकर पूर्ण सहयोग किया जाता है।
- सनातन, निदेशक राजाजी टाइगर रिजर्व