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तीन साल बाद 'अंधेरी कैद' से बाहर आईं बहनें, तस्वीरों में कहानी

Wed, 09 Dec 2015 08:43 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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चमोली जिले के काणा तोक गांव में गंभीर बीमारी के चलते अपने ही घर में कैद दोनों बहनों को तीन साल बाद घर से बाहर रोशनी में लाया गया। देखें तस्वीरें...
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तीन साल बाद 'अंधेरी कैद' से बाहर आईं बहनें, तस्वीरों में कहानी

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अमर उजाला में खबर छपने के बाद मंगलवार को स्वास्थ्य और तहसील प्रशासन की टीम काणा तोक पहुंची।
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तीन साल बाद 'अंधेरी कैद' से बाहर आईं बहनें, तस्वीरों में कहानी

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दोनों बच्चियों को डेढ़ किमी पैदल लोगों की मदद से और इसके बाद बीस किमी 108 के वाहन से जिला अस्पताल के इमरजेंसी में लाया गया।

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काणा गांव की दो बालिकाएं 16 साल की रुचि और 13 साल की विजया तीन साल से एक ही कमरे में कैद थीं।
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वह घर से बाहर सूर्य की रोशनी में आते ही लड़खड़ा कर गिर पड़ती थीं। उनकी आंखें बंद हो जाती हैं और रोने लगती थीं।
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गरीबी के कारण माता-पिता इनका इलाज नहीं करवा पा रहे थे। मंगलवार को यह खबर अखबार में प्रकाशित होने पर प्रशासन ने इसका संज्ञान लिया।
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मंगलवार सुबह नौ बजे प्रशासन की टीम ग्राम पंचायत कौंज-पोथनी गांव के काणा तोक पहुंची। दोनों बच्चियों को दोपहर गोपेश्वर लाया गया।

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यहां इमरजेंसी में चिकित्सकों ने दोनों का प्राथमिक उपचार किया। अब इनका इलाज देहरादून के कोरोनेशन अस्पताल में होगा।

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डा. शैलेंद्र कुमार ने बताया कि बच्चियां बहुत घबराई हुई हैं। इलाज के बाद ही इनके रोग का सही पता चल पाएगा।

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रुचि और विजया जिला अस्पताल के इमरजेंसी हाल में लगे पर्दों से मुंह छिपाती रहीं। वे यहां भी अंधेरा ढूंढती रहीं।
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कई बार स्ट्रेचर से गिरते-गिरते बची। दोनों बहनें कई बार सामान्य होकर लोगों के चेहरों को एकटक देखती तो उसके बाद एकाएक उनकी आंखें चुंधियाने लगती और वे बेड में मुंह छुपा कर रोने लगतीं।
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