19 जुलाई 2017 को मामले सामने आने के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बंधक नाबालिग को मुक्त कराया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ नाबालिग से दुराचार, जबरन पत्नी बनाने और बंधक रखने की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया, साथ ही नाबालिग की बहन व उसके पति को भी सह-आरोपी बनाया।
मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने अभियुक्त को दस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाते हुए 11 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। जिला शासकीय अधिवक्ता अवनीश नेगी ने बताया मामले में अभियोजन पक्ष की ओर नौ गवाह न्यायालय में पेश किए गए। न्यायालय ने नालसा प्रतिकर योजना से पीड़िता को सात लाख रुपये की धनराशि डीजीसी के माध्यम से देने के आदेश डीएम व एसएसपी को दिए हैं।