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फेसबुक पर ये था गायक पप्पू कार्की का आखिरी स्टेटस, सपना पूरा होने से पहले ही छोड़ गए दुनिया

Mon, 11 Jun 2018 09:09 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हल्द्वानी
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pappu karki
उत्तराखंड के उदीयमान गायकों में शुमार पवेंद्र उर्फ पप्पू कार्की की मौत की खबर जिसने भी सुनीं उसे इस बात पर यकीन ही नहीं हुआ। हमेशा हंसते-मुस्कुराते रहने वाला एक नौजवान यूं चला जाएगा किसी ने सोचा नहीं था। उनके जानने वालों से लेकर प्रशंसकों तक सभी ने उनके साथ बिताए पलों को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
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pappu karki
‘पाना है मुकाम वो मुकाम अभी बाकी है, अभी तो जमीन पर आए हैं आसमान की उड़ान बाकी है’ अपनी फेसबुक वॉल पर यह स्टेटस डालते समय पप्पू कार्की ने नहीं सोचा होगा कि वह अपने सपने को अधूरा छोड़कर चले जाएंगे। अपने गाने ‘डीडीहाट की जमना छोरी...’, ‘हीरा समधनी...’, ‘काजल क टिक लगा ले...’ आदि से घर-घर में पहचान बनाने वाले पप्पू कार्की की मौत पर हर किसी के लिए एक बार में यकीन करना आसान नहीं था। फिर चाहे वह आम इनसान हो या कोई बड़ी हस्ती, सभी का कहना था कि काश यह खबर झूठी हो।
 
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हेमंत पांडे - फोटो : file photo
अभिनेता हेमंत पांडे हो या त्विशा भट्ट या फिर लोक गायक हीरा सिंह राणा और मीना राणा, सभी ने कहा कि उन्हें पहली बार में खबर पर यकीन नहीं हुआ। वहीं, गायक पवनदीप राजन और ज्योति राजन ने बताया कि पप्पू दा हमेशा उन्हें आगे बढ़ने को कहते थे। कहा कि जब पापा ने उनके निधन की जानकारी दी तो यकीन ही नहीं हुआ कि पप्पू दा अब उनके बीच नहीं रहे।

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Pappu Karki - फोटो : file photo
अपनी अदाकारी से लोगों को हंसाने वाले मंगल सिंह चौहान पप्पू की मौत की खबर पर रो पड़े। संगीतकार सुरेश राजन ने बताया कि उन्होंने करीब 12 साल पहले पवेंद्र की कैसेट सुनी थी। इसके बाद एक कार्यक्रम में हुई मुलाकात में पवेंद्र ने उनसे चांचरी और छपीली के बीच का अंतर पूछा था। सुरेश ने बताया कि पप्पू भाई में सीखने की ललक थी और वह हमेशा सबको साथ लेकर चलने की सोचता था। 
 
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narendra singh negi
उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि उन्हें पूरा यकीन था कि लोक संगीत के क्षेत्र में पप्पू कार्की बहुत आगे जाएगा। बकौल नेगी दा ‘ वह अक्सर कहता था कि मुझे आपसे बात करने में डर लगता है।’ तब मैंने उससे कहा था कि डरने की क्या बात है, हम सब कलाकार ही तो हैं। उन्होंने बताया कि इंग्लैंड में इसी महीने होने वाले कार्यक्रम के लिए जब उनसे किसी कलाकार के बारे में पूछा गया तो उन्होंने आयोजकों को पप्पू का नाम ही सुझाया था।
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pappu karki
बकौल नेगी दा, उसका लोकगीतों के प्रति रुझान ही उसे आज के गायकों से अलग करता था। उनकी गायकी से प्रभावित होकर ही उन्होंने पप्पू कार्की को व्यक्तिगत रूप से फोन कर शुभकामनाएं दीं थीं। उनके निधन से उत्तराखंडी लोक संगीत को अपूर्णीय क्षति पहुंची है।

 
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