बदरीनाथ मंदिर के पीछे स्थित नर और नारायण पर्वत के बीच में नीलकंठ पर्वत है जिस पर शिवजी का निवास स्थान है। लेकिन यहां पर शिवजी के ठिकाना बनाने की कहानी बड़ी अनोखी है।
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बद्रीनाथ
- फोटो : amar ujala
दरअसल भगवान विष्णु के बदरीनाथ में अपना ठिकाना बनाने के पहले बदरीधाम भगवान शिव और माता पार्वती का ठिकाना हुआ करता था।
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विष्णु
पुराणों में एक अनोखी कथा मिलती है जिसमें भगवान विष्णु ने अपनी लीला द्वारा महादेव शिव और माता पार्वती का घर छीन लिया था।
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विष्णु शिव
कथा के मुताबिक एक बार भगवान विष्णु अपनी तपस्या के लिए स्थान ढूढ़ते हुए हुए बद्रीधाम को देखा तो वह स्थान उन्हें बहुत पसंद आया।
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शिव पार्वती
इसके बाद भगवान विष्णु ने बालक का रूप धर लिया और कुटिया के बाहर रोने लगे। बालक के रोने की आवाज सुन पार्वती जी बाहर जाने लगी। इस पर शिवजी ने उन्हें रोका कि यहां कौन बालक आएगा। जरूर यह कोई मायावी बालक होगा।
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badrinath
- फोटो : AmarUjala
पर पार्वती जी बालक के प्रति प्रेम को रोक न पाईं और उसे उठा कर कुटिया में ले आईं। इसके बाद बालक को सुलाकर शिवज के साथ पास के कुंड में स्नान करने चली गईं। जब दोनों लौटे तो कुटिया का दरवाजा अंदर से बंद था। तब शिवजी ने कहा कि देखा मैने पहले ही कहा था यह बालक मायावी था।
इसके बाद शिवजी ने माता पार्वती का प्रिय होने की वजह से बालक के लिए कुटिया छोड़ दी। इसके बाद शिवजी और पार्वती जी नीलकंठ पर्वत पर रहने चले गए। बाद में शिवजी केदारनाथ में आकर रहने लगे। इसके बाद बदरीनाथ भगवान विष्णु का और केदारनाथ शिवजी का ठिकाना बन गया।