राज्य की महिलाएं शिक्षा, स्वास्थ्य से लेकर घर-परिवार तक अपनी ‘शक्ति’ दिखा रही हैं। डॉ. सुरेखा डंगवाल जैसी महिलाएं देश ही नहीं विदेश तक में अपना और देश का नाम रोशन कर रही हैं। वहीं, कोई स्वास्थ्य के क्षेत्र में अच्छा काम कर रहा है, तो कोई संगीत। नवरात्र के अवसर पर अमर उजाला अपने पाठकों को उन महिलाओं के बारे में बता रहा है अलग-अलग क्षेत्रों में एक अलग मुकाम बनाया है।
विदेश के बच्चों को भी पढ़ाती हैं प्रो. सुरेखा
प्रो. डॉ. सुरेखा डंगवाल दून विश्वविद्यालय की कुलपति हैं। इसके साथ ही वह हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में अंग्रेजी, आधुनिक यूरोपीय और अन्य विदेशी भाषाओं के विभाग में प्रोफेसर हैं। 35 वर्षों के शैक्षिक अनुभव के दौरान विदेशों में भी छात्रों को शिक्षा देने का कार्य करती रही हैं। जर्मनी के कासल और हनोवर, जर्मनी में अंतर्राष्ट्रीय महिला विश्वविद्यालय में महिला अध्ययन पर फेलोशिप मिल चुकी है। प्रो. सुरेखा के 50 शोध-पत्र और तीन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।
कन्या भ्रूण हत्या रोकने को चलाया अभियान
उत्तरांचल महिला एसोसिएशन ‘’उमा’’ की अध्यक्ष साधना शर्मा महिलाओं के उत्थान के लिए कार्य कर रही हैं। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड नया राज्य बना तो पीसीपीएनडीटी एक्ट लागू नहीं था। यह एक्ट कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए होता है। इस एक्ट को लागू करने के लिए उनकी ओर से पोस्टकार्ड अभियान चलाया गया। मुख्यमंत्री, राज्यपाल और स्वास्थ्य मंत्री को अवगत करवाया। इसके बाद राज्य में पीसीपीएनडी एक्ट लागू हुआ।
शिवानी ने संगीत से बनाई पहचान
दून की शिवानी भागवत ने संगीत के हुनर पर अपनी पहचान बनाई है। वह उत्तराखंड के प्रसिद्ध पांडवाज ग्रुप की महत्वपूर्ण सदस्य हैं। उन्होंने कई मंचों पर अपने गीतों की धुन से लोगों को उत्तराखंडी संस्कृति से जोड़ने का काम किया है। शिवानी कई एलबम के गीतों में भी आवाज दे चुकी हैं। लोक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए शिवानी बॉलीवुड के बजाए उत्तराखंडी गीतों में ही अपनी आवाज का जादू बिखेरना चाहती हैं। वह विभिन्न राज्यों में सौ से अधिक शो में हिस्सा ले चुकी हैं।