नवरात्र पर हरिद्वार स्थित शक्ति के इस त्रिभुज की आराधना करने से भक्तों को अपार सुख की प्राप्ति होती है।
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हरिद्वार
इन दिनों हरिद्वार के पौराणिक एवं अन्य मंदिरों में भगवती आराधना दिनभर चल रही है। शत चंडी यज्ञों में आहुति डालने के लिए अनेक साधक पहुंच गए हैं।
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mansa devi
शक्ति आराधना के प्राकृत 'त्रिभुज' से यह समूची मायापुरी (हरिद्वार) प्राणवान हो गई है। सायंकाल देवी मंदिरों में भगवती की आरती की आभा देखते ही बनती है।
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chandi devi temple
शक्ति का ऐसा पुंज त्रिभुज के रूप से इस नगरी में विद्यमान है, जिसका केंद्र धरती में है। गंगा के इस और उस पार खड़ी दोनों पर्वतमालाओं पर मनसा और चंडी देवी विद्यमान हैं।
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maya devi temple
दोनों के ठीक बीच में भगवती का बीज केंद्र माया देवी है। यदि इन तीनों को एक अनाम त्रिभुज से मिलाया जाए तो धरती में केंद्रित अनोखा त्रिभुज बनता है। तीनों मंदिरों की साधना का फल एक मंदिर में पूजा से भी मिल जाता है।
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lord shiva
- फोटो : getty images
माया देवी वह स्थल है जहां कनखल में राजा दक्ष का यज्ञ ध्वंस करने के बाद शिवगण वीरभद्र ने सती की पार्थिव देह रखी थी। इसी स्थल से शिव मृत सती की देह को अपने कंधों पर उठाकर देशभर में तांडव करते हुए घूमे।
सती के अंग टूट टूटकर गिरते रहे और 52 शक्तिपीठ बन गई। उन सभी शक्तिपीठों का केंद्र भी यही माया देवी है। माया देवी के नाम पर ही हरिद्वार का नाम मायापुरी पड़ा। मायापुरी देश की प्राचीनतम सप्तपुरियों में से एक है। नवरात्र के दिनों में भगवती मंदिरों की शोभा देखते ही बनती है।