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वैज्ञानिकों ने खोला केदारनाथ धाम का बड़ा रहस्य, वहीं फिर से आपदा के लिए चेताया

Sat, 19 May 2018 10:09 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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kedarnath dham - फोटो : amar ujala
वाडिया संस्थान के शोध में केदारनाथ धाम के बारे में बड़ा खुलासा हुआ है। केदारनाथ में पांच से छह हजार साल पहले धान की फसल होती थी। वहां पर चौड़ी पत्तियों वाली वनस्पतियों का जंगल भी था।
 
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kedarnath
वाडिया संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप श्रीवास्तव के अनुसार में केदारनाथ क्षेत्र के आठ हजार साल के मौसम और स्थितियों के बारे में जानकारी जुटाई गई है। शोध बताता है कि केदारनाथ में क्षेत्र में कई बार ऐसी स्थिति आई की कि वहां पर बेहद गर्मी हो गई। पांच से छह हजार साल पहले केदारनाथ का मौसम खेती के अनुकूल था। वहां पर धान की खेती तक होती थी। इसके अलावा केदारनाथ क्षेत्र में चौड़ी पत्तियों वाली वनस्पतियों का जंगल भी था। इसका पता केदारनाथ क्षेत्र में मिले परागकण से जुड़े 122 सैंपल और कार्बन, नाइट्रोजन (मिट्टी की जांच) की आइसोटोप जांच के दौरान हुआ है। आइसोटोप की यह जांचें पोलैंड में कराई गई हैं। 

 
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snowfall in kedarnath - फोटो : amar ujala
वाडिया समेत दूसरे संस्थानों के वैज्ञानिकों ने चेताया है कि केदारनाथ में भारी निर्माण कार्य ठीक नहीं है। डॉ. प्रदीप श्रीवास्तव के अनुसार जब आपदा आई थी, उस इलाके का पूरा अध्ययन किया गया था। इसके बाद कई संस्तुतियां की गईं थीं। इन संस्तुतियों में देवप्रयाग से लेकर सोनप्रयाग का इलाका बफर जोन बनाया जाना था। जहां पर यात्रियों को ठहराते हुए आगे भेजना था।

 

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landslide in sonprayag - फोटो : AmarUjala
सोनप्रयाग से ऊपर के क्षेत्र में कोई भी कार्य न हो, इसकी संस्तुति भी वैज्ञानिकों ने की थी। इसके अलावा संवेदनशील जगहों पर कोई आपदा आने पर यात्रियों को निकालने के लिए एक सुनियोजित योजना और मार्ग को तैयार किया जाना था। इस दिशा में अभी कोई ठोस काम नहीं हुआ है। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. तलत अहमद के अनुसार केदारनाथ क्षेत्र में संतुलित निर्माण होना चाहिए। यहां पर लकड़ी जैसी कम वजन वाली चीजों से निर्माण करना उचित होगा। संवेदनशील जगहों पर भारी निर्माण कार्य उचित नहीं है। (File Photo)

 
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बारिश का नजारा - फोटो : amar ujala
अभी तक माना जाता रहा था कि भारत में मानसून के लिए तिब्बत का पठार, नागपुर का पठार, गंगा मैदान में होने वाली होने वाली गर्मी हिंद और महासागर जिम्मेदार होता है। वाडिया संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप श्रीवास्तव के अनुसार अटलांटिक महासागर जब गर्म होता है, तो उसके कारण हिंद महासागर से उठने वाले मानसून की हवायें तेजी से उत्तरी दिशा की तरफ बढ़ती हैं।

 
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kedarnath
इससे हिमालय के क्षेत्र में मानसून प्रभावित होता है। दूर से अटलांटिक महासागर के मानसून को प्रभावित करने को टेली कनेक्शन कहा जाता है। इसकी पुष्टि आईएमडी विभाग भी करता है। यही नहीं, अटलांटिक महासागर के गर्म और ठंडा होने से अलनीनो पर भी प्रभाव पड़ता है। डॉ. श्रीवास्तव के अनुसार इस बारे में नेचर पत्रिका में भी बीते दिनों शोध प्रकाशित हुआ है। केदारनाथ क्षेत्र में भी हजारों साल पहले मौसम में बदलाव के लिए अटलांटिक महासागर जिम्मेदार रहा है। 
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