सावन की शिवरात्रि पर मंगलवार 30 जुलाई को शिव भक्त भोलेनाथ का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करेंगे। इस दिन महादेव की पूजा करने से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। शिवरात्रि पर आप इन तीन शुभ मुहूर्त में पूजन कर सकते हैं। आगे जानिए...
विज्ञापन
2 of 6
- फोटो : अमर उजाला
शिवरात्रि के शिव चौदस से मिलन का योग 30 जुलाई को दोपहर बाद 2.48 बजे है। कांवड़ियों का शिवालयों में जलाभिषेक सोमवार की शाम प्रदोष लगते ही प्रारंभ हो गया है। अर्द्ध रात्रि 12 बजे से सभी शिवालयों में कांवड़िये जलाभिषेक करेंगे।
विज्ञापन
3 of 6
- फोटो : अमर उजाला
ज्योतिषाचार्य पंडित रामानंद के अनुसार, सोमवार रात 11:40 बजे से 30 जुलाई मंगलवार को सुबह 10 बजे तक जलाभिषेक कर सकते हैं। वहीं इसके बाद दोपहर 2:46 बजे से रात 9:10 बजे तक विशेष योग है। 31 जुलाई को भी सुबह 11:55 बजे तक जलाभिषेक कर सकते हैं।
4 of 6
- फोटो : अमर उजाला
शिवरात्रि शिव और शक्ति के मिलन का दिन है। इसलिए शिवजी के साथ माता पार्वती की भी पूजा करनी चाहिए। सुबह उठकर स्नानादि कार्यों से निवृत्त होकर शिवजी की पूजा करें। पूजा में शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, भांग और फूल चढ़ाएं।
विज्ञापन
5 of 6
- फोटो : अमर उजाला
कच्चा धागा लेकर शिव पार्वती के चारों ओर लपेटें और ओम नम: शिवाय मंत्र का जाप करें। इसके अलावा सावन मास में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन संध्या काल में शिवजी की पूजा और जलाभिषेक बहुत ही शुभ और फलदायी माना गया है।
इस समय को प्रदोष काल माना गया है। इस समय भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं। इस समय शिवजी और देवी पार्वती की पूजा से मनोकामना पूरी होती हैं।