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शिवरात्रि, त्रयोदशी और गुरु पुष्य योग, तीनों संयोगों के कारण इस साल सावन शिवरात्रि का खास महत्व है। इस दिन चंद्रमा का संचार मध्यरात्रि में कर्क राशि में होगा। इस समय शिवजी की पूजा से मानसिक बल बढ़ेगा। कुंडली में चंद्रमा की स्थिति अच्छी होगी। सावन में एक ही दिन जब इतने खास योग बन रहे हों, तब सुबह उठकर स्नानादि कार्यों से निवृत्त होकर शिवजी की पूजा करें। शिवरात्रि शिव और शक्ति के मिलन का दिन है। इसलिए शिवजी के साथ माता पार्वती की भी पूजा करनी चाहिए।