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प्रकृति के कहर की ये पांच दर्दनाक कहानियां कंपा देंगी आपकी रूह

Wed, 14 Jun 2017 08:53 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
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most horrible photos of kedarnath disaster - फोटो : file photo
समय बीत रहा है लेकिन प्रकृति के दिए जख्‍म उन लोगों की दिलों में आज भी हरे हैं, ज‌िन्होंने एक भयावह हादसे को अपनी आंखो से देखा और देखते ही देखते मौत की नींद सो गए।
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केदारनाथ आपदा - फोटो : amar ujala
2013 में 16 जून की रात आए सैलाब को इस 16 जून को चार साल ‌बीत जाएंगे।  ममता पार्क सोसायटी कापोदरा सूरत गुजरात के भीम भाई तबाही के दिन केदारनाथ आए थे। मौसम खराब हुआ तो पत्नी का कमजोर दिल उसे सह नहीं पाया। दिल का दौरा पड़ गया। आंखों के सामने पत्नी तड़प-तड़प कर दम तोड़ गई। डॉक्टरी मदद नहीं मिली।
 
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most horrible photos of kedarnath disaster
उस वक्त उन्हें बस एक ही अफसोस रहा कि अगर उस वक्त सड़क सही होती और साधन होते तो पत्नी यूं न मरती। दिल्ली के वसुंधरा एनक्लेव निवासी राधाकृष्ण अपने परिचित आनंद, शीला और सौम्या केदारनाथ यात्रा पर आए थे, लेकिन 16 की शाम से उनका कोई पता नहीं चल पाया। आपदा प्रबंधन के सभी नंबर लगाए लेकिन कोई जानकारी नहीं मिल पाई। 

 

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most horrible photos of kedarnath disaster
जून 2013 में कल्योण, उज्जैन मध्य प्रदेश से मांगलू सिंह 30 लोगों के साथ बाबा केदार के दर्शन करने आए थे। उनके साथ के सिर्फ दो लोग ही बचे। बाकी सभी साथी काल के गाल में समा गए।
 
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special photo gallery on kedarnath disaster

असम के नवीन गोस्वामी और उनके परिजन गौरीगांव के लोगों के साथ कई दिनों तक बचाव दल की राह देखते रहे। गांव में खाने-पीने का सामान भी खत्म हो गया। उस वक्त हेलीकॉप्टर से बिस्कुट के पैकेट गिराए गए, लेकिन वे मिट्टी और कीचड़ में सनकर खराब हो गए थे। 

 
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most horrible photos of kedarnath disaster
करनाल के तीर्थयात्री अमरिंदर सिंह, निरवेद सिंह और अमरजीत सिंह ने बताया कि 16 जून को गोविंदघाट पहुंचते ही मूसलाधार बारिश शुरू हो गई थी। वे हेमकुंड साहिब जाने का साहस नहीं जुटा पाए। उसी रात अलकनंदा नदी का जलस्तर बढ़ गया थी।

 
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kedarnath
जान बचाने को रात को ये लोग बदरीनाथ हाईवे की चोटी पर चढ़ गए। 17 जून को भी भूखे-प्यासे जंगल में ही रहे। उस वक्‍त वहां करीब पांच सौ स्थानीय लोग भी थे। इन्होंने बचने की आस छोड़ दी थी, लेकिन 19 जून की सुबह सेना के जवान देवदूत बनकर पहुचें औन इन्हें बचा लिया।
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