अलकनंदा नदी में गिरी यात्रियों की बस
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दो बच्चों सहित कुछ महिलाओं को कम चोटें थीं, पर वे दर्द से बिलख-बिलख कर रो रहे थे। सतेंद्र ने बताया कि स्थानीय अन्य युवाओं और व्यापारियों ने भी घायलों को सड़क तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साथ ही उन्होंने एनडीआरएफ, आईटीबीपी, सेना, फायर और पुलिस के रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने तक लगातार सहयोग किया।