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जिनके सुरों से देवता भी हो जाते हैं 'जागृत' उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से राष्ट्र ने किया सम्मानित

Sun, 27 Jan 2019 10:02 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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pritam bharatwan - फोटो : file photo
एक ऐसी आवाज जिसे सुनकर देवता भी जागृत हो जाते हैं। यही वजह है कि भारत सरकार भी आज इस आवाज के धनी लोकगायक को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया है।
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pritam bharatwan - फोटो : file photo
गांवों में पारंपरिक रूप से गाये जाने वाले जागरों को दुनिया भर के मंचों तक पहुंचाकर सम्मान दिलाने का श्रेय जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण को ही जाता है। उत्तराखंड के प्रत्येक जिले व गांव में लोग अपने अपने आराध्य देवताओं के दर्शन पा सके इसके लिए पूजा पाठ करते है,लेकिन ऐसी मान्यता है कि जागरों का देवताओं पर सबसे अधिक प्रभाव होता है। ऐसे में प्रीतम भरतवाण अकेले ऐसे गायक है जिनकी आवाज से देवता भी पवित्र व्यक्ति पर अवतरित हो जाते है। 
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pritam bharatwan - फोटो : file photo
प्रीतम के प्रयासों का ही नतीजा है कि कभी औजी या दास (ढोलवादक) समुदाय तक सीमित रहे जागर आज न केवल समाज के सभी वर्गों में सुने और गाये जाते हैं बल्कि उन्हें पूरा सम्मान भी दिया जाता है। उनकी इन उपलब्धियों के लिए ही भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित करने का निर्णय लिया है।

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pritam bharatwan - फोटो : file photo
प्रीतम भरतवाण का जन्म देहरादून के रायपुर ब्लॉक स्थित सिला गांव के एक औजी परिवार में हुआ। अपने दादा और पिता की तरह उन्होंने भी ढोल वादन के अपने पारंपरिक व्यवसाय को आगे बढ़ाया। मात्र छह वर्ष की उम्र में ही उन्होंने विरासत में मिले ढोल वादन और जागर गायन के अपने हुनर का सार्वजनिक रूप से प्रदर्शन करना शुरू कर दिया।
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pritam bharatwan - फोटो : file photo
वह अपने पिता के साथ गांव-घरों में गाए जाने वाले जागरों में संगत करने लगे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा गांव के ही विद्यालय से हुई। वह स्कूल में आयोजित होने वाले हर सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिस्सा लेते। 
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pritam bharatwan - फोटो : file photo
स्थानीय स्तर पर गायकी और ढोल वादन को सराहना मिली तो प्रीतम ने 1988 में आकाशवाणी के लिए गाना शुरू कर दिया। चार साल बाद उनका पहला ऑडियो एल्बम रंगीली बौजी बाजार में आया, जिसे खूब पसंद किया गया। इसके बाद प्रीतम ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और तौंसा बौ, पैंछि माया, सुबेर, सरूली, रौंस, तुम्हारी खुद, बांद अमरावती जैसे एक से बढ़कर एक सुपरहिट एलबम निकाले। 
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pritam bharatwan - फोटो : file photo
50 से अधिक एल्बम में वे 350 से अधिक गाने गा चुके हैं। वे सभी देवी देवताओं के जागरों को अपने सुरों से सजा चुके हैं। जागरों के पारंपरिक स्वरूप को बरकरार रखते हुए उन्होंने दुनिया भर के मंचों पर इसका प्रदर्शन किया है। जागर गायकी की बेजोड़ कला के लिए ही उन्हें जागर सम्राट की उपाधि भी प्रदान की गई है।
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