एक बार फिर बुराइयों के प्रतीक रावण का ऋषिकेश में पारंपरिक तरीके से अंत नहीं किया जा सका। कोरोना की आशंकित तीसरी लहर के चलते पिछले साल की तरह इस बार भी प्रतीकात्मक रूप से इकोफ्रेंडली दशहरा मनाया गया। त्रिवेणी घाट पर रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतले को पूजा-अर्चना के बाद गंगा में प्रवाहित कर दिया गया।
त्रिवेणी घाट स्थित आरती स्थल पर रावण 15 फीट, कुंभकरण 8 फीट और मेघनाद 8 फीट के पुतले लगाए गए। दोपहर करीब एक बजे पूजा अर्चना की गई। स्थानीय श्रद्धालुओं ने नवरात्र के आरंभ में घरों में रोपे गए जौ अर्पित किए। इसके तीनों पुतलों को गंगा में प्रवाहित कर दिया गया।
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सुभाष क्लब दशहरा कमेटी ऋषिकेश के सदस्य और कार्यक्रम संयोजक राहुल शर्मा ने बताया कि कोरोना महामारी के मद्देनजर दशहरा पर्व को प्रतीकात्मक रूप से मनाया गया। इस दौरान महंत विनय सारस्वत, ललित सक्सेना, राकेश शर्मा, योगेश शर्मा, विश्वास जोशी, मनोज गुप्ता, हीरालाल शर्मा, विजय सिंघल, पंकज जायसवाल, राजू गुप्ता, दिनेश उपाध्याय, दीपक भटनागर, योगेश शर्मा, संजय शर्मा, कमल ढींगरा, केशव पोखरियाल, सोमू, गिरीश जोशी आदि थे। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतले बांस और रंगीन कागज से बनाए गए थे।