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चारधाम यात्रा रूट की 'खूनी' सड़कों पर आपकी जान की कोई गारंटी नहीं!

Mon, 01 May 2017 02:14 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, गढ़वाल
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danger zone, badrinath highway, chardham yatra - फोटो : amar ujala
चारधाम यात्रा शुरू हो चुकी है। हादसे रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। उधर, प्रशासन मौन बैठा है। पिछले एक साल में 132 जानें जा चुकी है। इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि इस रूट पर आपकी जान की गारंटी कुछ भी नहीं है। 

गढ़वाल में बदहाल सड़कें, ओवरलोडिंग और नशे में ड्राइविंग की वजह से आए दिन लोग अकाल मौत को प्राप्त हो रहे हैं। पुलिस प्रशासन ओवरलोडिंग को रोकने में विफल है तो पीडब्ल्यूडी और संबंधित विभागों को लोगों के धरने- प्रदर्शन और गुहार की कोई परवाह नहीं है। जिसके चलते आए दिन पहाड़ पर वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। जानिए, जनपदवार सड़क हादसों के मामले।
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चमोली 1 वर्ष, 10 हादसों, 35 की मौत

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danger zone, badrinath highway, chardham yatra - फोटो : amar ujala
चमोली जिले में कई सड़कें जानलेवा बनी हुई हैं। पिछले एक वर्ष में सड़कों की खस्ताहाल के कारण दस वाहन दुर्घटनाओं में 35 की मौत और 59 लोग घायल हुए हैं। मोलागाड-मटई, मटई-बैरासकुंड, नंदप्रयाग-घाट, गोपेश्वर-पोखरी, बामनाथ-पोखरी, हापला-कलसिर, नंदप्रयाग-देवखाल, चमोली-लासी, पलसारी-बमियाला, सोनला-कंडारा, चमोली-खैनुरी, घाट-बांजबगड़, घाट-कुरुड़, कांडई-बैरासकुंड सहित कई संपर्क मार्गों के डेंजर जोनों पर पैराफिट तक नहीं हैं।

चमोली-लासी सड़क पर एक दर्जन से अधिक वाहन दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। मौजूदा समय में भी यह सड़क कई जगहों पर जानलेवा बनी हुई है। भाजपा नेता वीरेंद्र असवाल का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने वाली सड़कें चट्टानी भागों पर खतरनाक बनी हैं। इन जगहों पर स्टील गॉर्डर और पैराफिट लगाए जाने चाहिए। जनवरी 2016 में घाट सड़क पर जिस स्थान पर बस दुर्घटना हुई थी, वहां पर अभी भी सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं।
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रुद्रप्रयाग : 7 माह, 20 हादसे, 19 की मौत

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danger zone, badrinath highway, chardham yatra
रुद्रप्रयाग जनपद में बदरीनाथ और केदारनाथ हाईवे के साथ लोनिवि और पीएमजीएसवाई सहित अन्य कार्यदायी संस्थाओं की 100 से अधिक संपर्क मार्ग हैं। 19 अक्तूबर 2016 को ऋषिकेश-बदरीनाथ राजमार्ग पर रतूड़ा के समीप हुए सड़क हादसे में तीन युवकों की दर्दनाक मौत हो गई थी, जिसमें पीएनबी के दो कर्मी व एक सेना का जवान था।  घटना का पता 20 अक्तूबर की सुबह लगा था। हादसे का कारण हाईवे पर सुरक्षा दीवार का नहीं होना रहा। 20 नवंबर को टैठी-पाटा संपर्क मोटर मार्ग पर मैक्स दुर्घटना में 2 साल के एक बच्चे की मौत हो गई थी, जबकि 5 लोग घायल हो गए थे। कुछ दिन बाद बदरीनाथ हाईवे पर नरकोटा के समीप एक वाहन खाई में गिरा था, जिसमें एक युवक की मौत हो गई थी।

23 दिसंबर को घोलतीर के समीप ट्रक हादसे में चालक की मौत हो गई थी। इस वर्ष 9 जनवरी को रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे पर गुप्तकाशी के समीप एक आल्टों दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी, जिसमें महिला सहित 3 लोग घायल हुए थे। 18 जनवरी को इसी हाईवे पर हुए हादसे में कुंड के समीप सोनप्रयाग के थानाध्यक्ष रामकुमार जुयाल की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। मार्च माह के दूसरे सप्ताह में जखोली-मयाली मार्ग पर जाखणी में मैक्स अनियंत्रित होकर सड़क पर ही पलट गई थी, जिसमें दस लोग घायल हो गए थे। जबकि 29 अप्रैल को चोपता-उर्खोली मार्ग पर हुए मैक्स हादसे में 8 लोगों की मौत हो चुकी है। इन सभी हादसों का कारण सड़कों की बदहाली के साथ कुछ मामलों में ड्राइवर की लापरवाही भी रही।

पौड़ी : 11 माह में 23 ने गंवाई हादसों में जान

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danger zone, badrinath highway, chardham yatra - फोटो : amar ujala
पौड़ी जिले में 12 जून 2016 को नजीबाबाद-बिजनौर मार्ग पर सड़क किनारे बिजली के खंभे से कार के टकराने के कारण कोटद्वार निवासी एक परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई थी। 2 जुलाई 2016 को रिखणीखाल-डेरियाखाल मोटर मार्ग में कुलानीखाल के पास  कार के खाई में गिरने से तीन लोग काल का ग्रास बने। 20 जुलाई 2016 को पोखड़ा के बगड़ीगाड़ में कार के खाई में गिरने से शिक्षक की मौत हो गई थी। तीन नवंबर 2016 को बैजरो-जोगीमढ़ी मोटर मार्ग पर पीरबाबा मंदिर के समीप मैक्स खाई में गिरने से सात लोगों की मौत हो गई थी।

18 दिसंबर 2016 सतपुली-गूमखाल के बीच कुलहाड़ बैंड के समीप कार के खाई में कार गिरने से महिला की मौत हो गई थी। 19 दिसंबर को लक्ष्मण झूला-कौड़ी नेशनल हाईवे पर कार गिरने से तीन लोगों की जान चली गई थी। 13 फरवरी को चौबट्टाखाल के वेंदुल के समीप इंडिगो कार के खाई में गिरने से एक युवक की मौत हो गई थी। 20 अप्रैल को लैंसडौन तहसील के ढौंटियाल बसड़ा-चपेड़ैत मोटर मार्ग पर कार के खाई में गिरने से कोटद्वार निवासी चार लोगों की मौत हो गई थी।
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टिहरी : 386 दुर्घटनाएं, 46 काल के मुंह में समाए

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पर्वतीय क्षेत्र के सड़क मार्गों पर वाहन दुर्घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही है। टिहरी जिले के अंतर्गत सवा साल में 386 वाहन दुर्घटनाओं में 46 लोग काल के मुंह में समा चुके है और 404 लोग घायल हुए है। सबसे अधिक 25 वाहन दुर्घटनाए ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर तोताघाटी और कीर्तिनगर के बीच हुई है।

वर्ष 2016 में टिहरी जिले में 120 दुर्घटनाएं हुई। इन हादसों में 33 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी और 356 लोग घायल हुए। वर्ष 2017 में जनवरी से अब तक जिले में 18 दुर्घटनाएं हुईं  जिनमें 17 लोग मौत का ग्रास बने और 48 लोग घायल हुए है।
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उत्तरकाशी : 8 दुर्घटनाओं में नौ काल के गाल में समाए

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हाईवे से मलवे को हटाटी मशीन - फोटो : Amar Ujala
सीमांत जनपद उत्तरकाशी में राष्ट्रीय राजमार्ग की स्थिति में पिछले कुछ समय से काफी बदलाव देखने को मिला है। गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर नालूपानी, नेताला, लालढांग, गंगनानी, डीएम स्लाइड, ढबरानी आदि कई डेंजर जोन हैं, लेकिन पिछले एक साल में इन डेंजर जोनों में काफी कुछ बदलाव नजर आया है।

यहां अब दुर्घटनाओं पर अंकुश लगा है लेकिन लिंक मार्ग कई जगह अभी भी दुर्घटना को न्यौता दे रहे हैं। इसी 26 अप्रैल की शाम गंगोत्री हाईवे पर भैरोंघाटी के समीप बाइक दुर्घटना में एक घायल हो गया, जबकि दूसरा बाइक सवार का अभी तक पता नहीं चल पाया है। भैरोघाटी मोड़ के पास गहरी खाई में गिरी बाइक में सवार युवक को तलाशने के लिए पुलिस, एसडीआरफ व सेना के जवानों ने कई दिन तक भागीरथी समेत पहाड़ी में खोज एवं बचाव अभियान चलाया, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। इस दुर्घटना का भी मुख्य कारण ओवर स्पीड होना बताया गया।
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