फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अगर सालों पहले नहीं करते ऐसा, तो शायद नहीं होता रक्षाबंधन, जानिए

Sat, 29 Jul 2017 09:21 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
1 of 5
rakhi
रक्षाबंधन के संदर्भ में कहा जाता है कि अगर इस पर्व का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व नहीं होता तो शायद यह पर्व अब तक अस्तित्व में रहता ही नहीं।
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 5
rakshabandhan
रक्षा बंधन भाई और बहन के रिश्ते की पहचान माना जाता है। राखी का धागा बांध बहन अपने भाई से अपनी रक्षा का प्रण लेती है। यूं तो भाई-बहनों के प्रेम और कर्तव्य की भूमिका किसी एक दिन की मोहताज नहीं, लेकिन रक्षाबंधन के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व की वजह से ही यह दिन इतना महत्वपूर्ण बना है। रक्षाबंधन के संदर्भ में भी कहा जाता है कि अगर इस पर्व का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व नहीं होता तो शायद यह पर्व अब तक अस्तित्व में रहता ही नहीं।
विज्ञापन

3 of 5
Lunar eclipse
इस बार रक्षाबंधन 7 अगस्त को आ रहा है। इस दिन चंद्रग्रहण भी है। इसके चलते यह भी बताया गया है कि इसे मनाने के लिए सुबह 11 बजे से 1 बजकर 
52 मिनट का ही समय है। इसके चलते बहनों के लिए अपने भाईयों को राखि बांधने की परीक्षा भी है। 

4 of 5
महाभ्‍ाारत
महाभारत में भी रक्षाबंधन के पर्व का उल्लेख है। जब युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा कि मैं सभी संकटों को कैसे पार कर सकता हूं, तब कृष्ण ने उनकी तथा उनकी सेना की रक्षा के लिए राखी का त्यौहार मनाने की सलाह दी थी। शिशुपाल का वध करते समय कृष्णकी तर्जनी में चोट आ गई, तो द्रौपदी ने लहू रोकने के लिए अपनी साड़ी फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दी थी। यह भी श्रवण मास की पूर्णिमा का दिन था। कृष्ण ने चीरहरण के समय उनकी लाज बचाकर यह कर्ज चुकाया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
चित्तौड़ की विधवा महारानी कर्मावती
चित्तौड़ की विधवा महारानी कर्मावती ने जब अपने राज्य पर संकट के बादल मंडराते देखे तो उन्होंने गुजरात के बहादुर शाह के खिलाफ मुगलसम्राट हुमायूंको राखी भेज मदद की गुहार लगाई और उस धागे का मान रखते हुए हुमायूं ने तुरंत अपनी सेना चित्तौड़ रवाना कर दी। इस धागे की मूल भावना को मुगल सम्राट ने न केवल समझा बल्कि उसका मान भी रखा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें