21 मार्च को कांग्रेस के बागी विधायक भाजपा के विधायकों के साथ राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिले और प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की मांग की थी। इन विधायकों के भाजपा के साथ मिलकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल देने और केंद्रीय कैबिनेट की 26 मार्च की सिफारिश के बाद 27 मार्च 2016 को राज्य में प्रणब मुखर्जी के हस्ताक्षर से पहली बार राष्ट्रपति शासन लगा था। माना जाता है कि प्रणब मुखर्जी कैबिनेट के निर्णय पर पुन: विचार करने की सलाह देना चाहते थे, लेकिन भाजपा आलाकमान की पहल पर अरुण जेटली की उनसे वार्ता और सांविधानिक व्यवस्थाओं के तहत उन्होंने कैबिनेट की सिफारिश पर बगैर विवाद में पड़े हस्ताक्षर कर दिए थे।