पाकिस्तान के 160 हिंदुओं सहित भारत के विभिन्न राज्यों से एकत्रित कर लाई गई 6325 अस्थियों को कलश यात्रा के रूप में बैंडबाजों के साथ कनखल के सतीघाट पर विधि विधान से गंगा में विसर्जित किया गया।
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- फोटो : AmarUjala
पाकिस्तान के कराची शहर स्थित श्री पंचमुंखी हनुमान मंदिर के महंत रामनाथ मिश्रा अपने भतीजे कबीर मिश्रा के साथ एक पखवाड़े पहले 160 हिंदुओं की अस्थियां लेकर भारत आए थे।
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इन अस्थि कलशों को दिल्ली के निगम बोध घाट पर रखा गया। जहां दिल्ली, हिमाचल, हरियाणा आदि से एकत्रित किए गए अन्य अस्थि कलशों को साथ मिलाकर शुक्रवार की रात अंतिम कलश यात्रा यहां पहुंची। यहां इन अस्थि कलशों को निष्काम सेवा ट्रस्ट में रखा गया।
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शनिवार सुबह बैंडबाजों और पुष्प वर्षा के बीच देवोत्थान सेवा समिति व धर्मयात्रा महासंघ के बैनर तले अस्थि कलशों को खडख़ड़ी भीमगोड़ा, हरकी पैड़ी, अपर रोड से कनखल होते हुए सतीघाट पर लाया गया। यहां वैदिक रीति रिवाज के साथ अस्थियों को गंगा में विसर्जित कर दिया गया।
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पाकिस्तान से आए महंत रामनाथ मिश्रा ने कहा कि पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं की यह इच्छा रहती है कि उनकी अस्थियां मां गंगा की गोद में विसर्जित की जाए। इसलिए उन्होंने अस्थियां हरिद्वार लाने का निर्णय लिया।
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कालका पीठाधीश्वर सुरेंद्र नाथ अवधूत, स्वामी रामेश्वरानंद सरस्वती, देवोत्थान सेवा समिति के संयोजक विजय शर्मा, धर्मयात्रा संघ के राष्ट्रीय महामंत्री कृष्ण कुमार अग्रवाल, दीपक अग्रवाल, रामकृष्ण लोहिया, नरेंद्र कुमार अरोड़ा, अवधेश शर्मा, रघुवीर दयाल आदि ने विचार रखे।
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आयोजकों व संतों ने कहा कि लावारिस अस्थियों को मां गंगा की गोद में विसर्जित करने से बड़ा पुण्य कोई और नहीं हो सकता है।
बड़ी संख्या में लोगों ने अस्थि कलशों पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। दिल्ली से हरिद्वार तक पहुंचने के दौरान गाजियाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर, रुडक़ी आदि शहरों में जगह जगह लोगों ने अस्थि कलशों पर पुष्प चढ़ाए।