पद्मावत को लेकर हो हल्ला कर रही करणीसेना के साथ अगर ये लोग भी शामिल होते तो हो सकता था कि आंदोलन और भी उग्र हो जाता और पद्मावत रिलीज नहीं हो पाती।
Trending Videos
विज्ञापन
2 of 7
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती
दरअसल, जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का कहना है कि चित्तौड़ में ऐतिहासिक जौहर केवल पद्मावती या क्षत्राणियों ने नहीं किया था, उनके साथ जौहर करने वाली 16 हजार स्त्रियां सनातन धर्म के सभी वर्णों और जातियों से जुड़ी हुई थी।
विज्ञापन
3 of 7
PADMAVATI
पद्मावती फिल्म का मुद्दा केवल पद्मिनी के वंशजों या क्षत्रियों का नहीं है। यह मुद्दा पूरे सनातनी समाज का है। दुर्भाग्य से राजपूतों ने अलग आंदोलन चलाकर सभी से किनारा कर लिया।
4 of 7
padmavati
स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि सनातन धर्मियों को साथ लेकर न चलने से न्यायालय में पद्मावती का पक्ष तरीके से नहीं रखा गया। ऐतिहासिक तथ्य है कि मुस्लिम आक्रांताओं ने हिंदुओं पर अनेक हमले किए। विजयी होने पर मुस्लिम सैनिक हिंदुओं की पत्नियों, माताओं और बहनों पर टूट पड़ते और उन्हें अपमानित करते।
विज्ञापन
5 of 7
padmavati
ऐसा कहीं नहीं लिखा है कि मुसलमानों ने जिसका अपमान किया, वह क्षत्राणी ही थी। चित्तौड़ विजय के बाद अलाउद्दीन खिलजी और उसके सैनिकों द्वारा अपमानित होने से बचने के लिए पद्मावती के साथ जिन हजारों स्त्रियों ने जौहर किया, वे मात्र राजपूत नहीं थी।
विज्ञापन
6 of 7
padmavat
- फोटो : PTI
वे सनातन धर्म के सभी वर्णों और जातियों से आई स्त्रियां थी। आंदोलनकारियों ने ऐसा दिखाया मानो क्षत्राणियों ने ही अपने प्राण त्यागे हों और उन्हीं को अपमानित किया गया हो। मुस्लिम आक्रमणकारी आम हिंदुओं को अपने जुल्म का शिकार बनाते थे।
कहा कि करणीसेना ने केवल राजपूत और क्षत्रियों को साथ लेकर आंदोलन किया। जबकि अगर यह आंदोलन सनातन धर्म के वर्गों को साथ लेकर एकजुट होते तो बात बनती। वहीं उनके इस बयान के बाद लगता है कि अगर सनातन वर्ग भी इस आंदोलन में जुड़ता तो आंदोलन और भी बढ़ सकता है।