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PIX: खतरनाक पुलों में शामिल इस पुल में विदेशियों की एंट्री बैन है...

Sun, 17 Jan 2016 09:14 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड में मौजूद इस पर्यटन स्थल की प्राकृतिक सुंदरता के सामने विदेशों की लोकेशन फीकी पड़ जाएगी। तस्वीरों में देखें...
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गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान में मौजूद इस घाटी में नवंबर और दिसंबर में आने की मनाही है।
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यहां आने के बाद पर्यटकों को नेलांग घाटी में बना वुडेन ब्रिज देखने को मिल सकता है। यह वुडन ब्रिज बिल्कुल वैसा ही है जैसा क्रॉसिका में फिल्माए गए तमाशा फिल्म के गाने में है। पहाड़ी पेड़ों के अलावा यहां हिम तेंदुआ और हिमालयन ब्लू शीप देखने को मिल जाते हैं। पर्यटकों का कहना है कि यह जगह लद्दाख से भी बेहतर है।

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दरअसल, उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में नेलांग घाटी स्थित है जो अपार प्राकृतिक सुंदरता समेटे हुए है। घाटी की ऊंचाई समुद्र तट से करीब 11,000 फीट ऊंची है। इस वजह से यहां साल भर बर्फ को देखा जा सकता है।
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1962 में भारत-चीन के बीच लड़ाई के बाद घाटी को हमेशा के लिए पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया था। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगभग 52 साल बाद नेलांग घाटी को पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है।
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नेलांग घाटी ना सिर्फ़ सुंदर जगह है बल्कि यहां से भारत-चीन के बीच बहुत बड़ा व्यापारिक रास्ता हुआ करता था। गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान में मौजूद इस घाटी में नवंबर और दिसंबर में आने की मनाही है। यहां किसी को भी रात गुजारने की इजाज़त नहीं है। इसके अलावा सुरक्षा कारणों की यहां विदेशियों का आना प्रतिबंधित है।
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भारत-चीन युद्ध के समय खाली कराए गए नेलांग और जाढ़ूंग गांव के अवशेष आज भी यहां मौजूद हैं। इन गांवों का कुछ हिस्सा आईटीबीपी के प्रयोग में है। कई भवनों के अवशेष पुरानी वास्तुकला तथा जीवन शैली का परिचय देते हैं। नेलांग घाटी से कालिंदी-बदरीनाथ ट्रैक के साथ ही हिमाचल तथा हरकीदून क्षेत्र में खुलने वाले कई उच्च हिमालयी ट्रैक का रास्ता भी है।

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इनके अलावा ग्लेशियरों से निकलने वाली सदानीरा जाड़गंगा आदि छोटी नदियां, झरने, सरहद की सुरक्षा में जुटे आईटीबीपी एवं सेना के जवानों की कठोर जीवन शैली भी देखने को मिलती है। यहां सर्दियों में भीषण बर्फबारी के कई माह बाद तक भी हिमखंडों की मौजूदगी और बरसात सीजन में हिमालयी पठारों की हरियाली पर्यटकों को आकर्षित करेगी।

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गंगोत्री नेशनल पार्क में पड़ने वाली घाटी में हिम तेंदुआ, भूरा भालू, बारहसिंघा, भरल, गुलदार आदि दुर्लभ वन्य जीवों तथा हिमालयी पक्षियों का दीदार भी हो सकता है। भारत-चीन सीमा से लगी होने के कारण नेलांग घाटी सामरिक दृष्टि से काफी संवेदनशील भी है।
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इस वजह से इसे प्रतिबंधित इनर लाइन में रखा गया है। घाटी में प्रवेश के लिए प्रशासन से इनर लाइन का परमिट लेना अनिवार्य है, जबकि शेष अनुमति वन विभाग के माध्यम से मिलती है। पर्यटक अपने वाहनों से घाटी में प्रवेश नहीं कर सकते। इसके लिए वन विभाग की ओर से लगाए गए वाहनों में ही आवाजाही की जा सकती है।गी। जल्द ही शुल्क तथा अन्य नियमों का निर्धारण किया जा रहा है।
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