जहां कभी भगवान शिव और पार्वती साक्षात विराजमान थे उस धाम में एक बेहद खास और अद्भुत तांत्रिक मंदिर है। क्यों चौंक गए ना। जी हां, लेकिन यह बिल्कुल सच है। भगवान शिव के इस धाम में यह तांत्रिक मंदिर आम होते हुए भी बहुत खास है। जानिइ इसका रहस्य...
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हिमालय की गोद में बसे केदारनाथ धाम के रास्ते में यह मंदिर है। यह एक बहुत ही शक्तिशाली तांत्रिक मंदिर है जिसे भैरवेश्वर मंदिर के नाम से जाना जाता है।
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यह मंदिर उन लोगों के लिए बना है जो अपने जीवन में साधना के एक खास स्तर, ग्रहणशीलता और निपुणता के एक खास स्तर तक पहुंच चुके हैं। जो चेतना के एक खास स्तर तक पहुंच चुके हैं।
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यह ऐसे साधकों के लिए है, जिन्हें कुछ खास आयामों में मदद की जरूरत है। यहां खास लोग आकर तंत्र विज्ञान का इस्तेमाल कर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते हैं।
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यह मंदिर उन लोगों के लिए एक सलाहकार की भूमिका अदा करता है। इसलिए लोग यहां पर बैठकर योग साधना करते हैं और उपने लक्ष्य को पाते हैं।
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इस मन्दिर को बहुत छोटा और मामूली तरीके से बनाया गया है, ताकि लोग भी उसे ज्यादा महत्व न दें और न ही वहां ज्यादा वक्त गुजारें। ज्यादातर लोगों ने तो इस मन्दिर की तरफ ध्यान भी नहीं दिया होगा।
इस मंदिर के बारे में जनश्रुतियां हैं कि तंत्र-विद्या की इस पूरी प्रक्रिया का संबंध प्रकृति से है, शिव से उसका कोई लेना-देना नहीं। शिव तंत्र की परवाह नहीं करते, हालांकि वे तंत्र के गुरु हैं। वे लोग, जो तंत्र का अभ्यास करते हैं, शिव की पूजा कभी नहीं करते, वे शिव को सिर्फ दूर से पूजते हैं।
(अमर उजाला इन तथ्यों की तस्दीक नहीं करता है। यह केवल मान्यताओं के आधार पर पेश किए गए हैं।)