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Museum Day: संग्रहालय बने तो दुनिया जाने मसूरी का गौरवशाली इतिहास, आज देखें पहाड़ों की रानी की ये खास तस्वीरें

Thu, 18 May 2023 01:45 PM IST
रेनू सकलानी सुनील रमेश सिलवाल, संवाद न्यूज एजेंसी, मसूरी

सार

इतिहासकार गोपाल भारद्वाज, लिथोग्राफ, पांडुलिपि, महात्मा गांधी और पं. नेहरू का मसूरी दौरा, मसूरी बसाने वाले कैप्टन यंग, 
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ऐसे दिखती थी पहले मसूरी - फोटो : अमर उजाला

पहाड़ों की रानी मसूरी प्राकृतिक रूप से जितनी खूबसूरत है उतना ही गौरवशाली इसका इतिहास है। अंग्रेजों का बसाया यह हिल स्टेशन अपने दामन में 200 साल पुरानी यादें संजोए हुए है। इतिहासकार गोपाल भारद्वाज के पास मसूरी के इतिहास से जुड़े कई अहम दस्तावेज, ऐतिहासिक मानचित्र, लिथोग्राफ, पांडुलिपि और दुनिया की महान हस्तियों के मसूरी दौरे की दुर्लभ तस्वीरों समेत 18वीं और 19वीं शताब्दी में इस्तेमाल होने वाली कई वस्तुएं आज भी मौजूद हैं।

अगर शहर में संग्रहालय बने तो इन दुर्लभ चीजों का दीदार आमजन भी कर सकेंगे। गोपाल भारद्वाज का कहना है कि मसूरी में दुनियाभर से पर्यटक आते हैं, वे यहां की खूबसूरती से तो वाकिफ हैं, लेकिन शहर के गौरवशाली इतिहास के बारे में उन्हें जानकारी नहीं मिल पाती।

यह अफसोस की बात है कि 200 सालों के इतिहास से आज की पीढ़ी को रूबरू कराने के लिए शहर में एक संग्रहालय तक नहीं है। नगर पालिका परिषद मसूरी के स्थापना के दो सौ साल पूरे होने पर जश्न मनाने की तैयारी कर रही है, लेकिन पर्यटकों को इसके इतिहास से रूबरू कराने के लिए कोई पहल नहीं कर रही।

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अंग्रेजों के शासन काल में इस तरह से होता था मनोरंजन - फोटो : अमर उजाला

18वीं और 19वीं शताब्दी की वस्तुएं भी

गोपाल भारद्वाज ने बताया कि उनके पास 1814 में गोरखा-अंग्रेज युद्ध में इस्तेमाल किया गया तोप का गोला आज भी मौजूद है। 1917 का प्रेशर कुकर, कई ऐसी निगेटिव जिसमें 1935 से लेकर 1942 तक की यादगार तस्वीरें हैं वह भी उनके पास है। गोपाल ने बताया कि वे चाहते थे कि ये सभी दस्तावेज और तस्वीरें आमजन के सामने प्रदर्शित हों, लेकिन शहर में संग्रहालय नहीं बन पाने के कारण ज्यादातर दस्तावेज, पांडुलिपि और तस्वीरें उन्हें निजी हाथों में देनी पड़ी।

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मालरोड पर घूमते अंग्रेज - फोटो : अमर उजाला

महात्मा गांधी और पं. नेहरू के मसूरी दौरे की तस्वीरें आज भी सुरक्षित

भारद्वाज बताते हैं कि 28 मई 1946 को महात्मा गांधी मसूरी आए थे। वे यहां 9 जून तक रहे थे। इस दौरान उन्हाेंने पिक्चर पैलेस स्थित सिल्वर्टन ग्राउंड में प्रार्थना सभा करते हुए स्थानीय लोगों के साथ मिलकर देश की आजादी की लड़ाई की रणनीति बनाई थी। मसूरी दौरे के दौरान गांधी जी बिरला हाउस में रुकते थे। इसके पहले 1929 में भी गांधी जी मसूरी आए थे। इन सब अहम पलों की तस्वीरें उनके पास हैं।

 

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महात्मा गांधी का मसूरी दौरा - फोटो : अमर उजाला

गांधी जी के अलावा गोपाल भारद्वाज के पास पंडित जवाहर लाल नेहरू के मसूरी दौरे से जुड़ीं यादों की तस्वीरें और दस्तावेज भी हैं। भारद्वाज ने बताया कि पं. नेहरू 1914 से लेकर 1964 तक कई बार मसूरी आए थे। अपने जीवन के अंतिम दिनों में भी उन्होंने मसूरी दौरा किया था। 25 मई 1964 को सुबह साढ़े नौ बजे वे मसूरी का दौरा कर लौटे थे और 27 मई को उनका निधन हो गया था। नेहरू के उस अंतिम दौरे की तस्वीरें भी उनके पास हैं।

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मसूरी में चर्चा करते राजनेता - फोटो : अमर उजाला

भारत का 1814 से लेकर 1871 तक का मानचित्र भी

गोपाल के कलेक्शन में सुभाषचंद्र बोस, मोतीलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, स्वरूप रानी, महाराजा कपूरथला, महाराजा पटियाला, महाराजा नाभा, महाराजा जिंद के भी मसूरी दौरे की तस्वीरें भी थीं। उनके पास इंदिरा गांधी के बाल्यकाल की भी एक तस्वीर थी। इस तस्वीर में बालिका इंदिरा मालरोड पर मोतीलाल नेहरू की अंगुली पकड़कर चल रही हैं। इन तस्वीरों के अलावा उनके पास भारत का 1814, 1818, 1820, 1920 और 1871 का ऐतिहासिक मानचित्र भी था।

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मसूरी में ंअंग्रेज शासनकाल में चलाए जाते थे हाथ रिक्शा - फोटो : अमर उजाला

कई तस्वीरें बेचनी पड़ीं, कई खराब हो गईं

गोपाल भारद्वाज ने बताया कि यदि शहर में कोई संग्रहालय होता तो वे अपने पास मौजूद मसूरी की दुर्लभ तस्वीरों, दस्तावेजों और वस्तुओं को वहां प्रदर्शित करते, ताकि आमजन जान सकें कि पहाड़ों और इमारतों के अलावा मसूरी का एक बहुत खूबसूरत इतिहास भी है। लेकिन संग्रहालय नहीं होने के कारण ज्यादातर तस्वीरें और दस्तावेज खराब हो गए। जबकि कुछ को नष्ट होने से बचाने के लिए बेचना पड़ा।

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मसूरी बसाने वाले कैप्टन यंग - फोटो : अमर उजाला

गोपाल ने बताया कि ये दस्तावेज और तस्वीरें उन्हें उनके पिता राजगुरु ऋषि भारद्वाज से विरासत में मिले हैं। उनके पिता ने भी शहर में संग्रहालय बनवाने की बहुत कोशिश की, लेकिन किसी ने सहयोग नहीं किया। अब दो दशक से वे भी संग्रहालय के लिए प्रयास कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदारों ने सिवाय आश्वासन देने के कुछ नहीं किया। अब थोड़ी बहुत वस्तुएं और दस्तावेज उनके पास हैं, जो आज भी संग्रहालय बनने का इंतजार कर रही हैं

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अंग्रेजो के आगमन की शिलालेख आज भी भद्रराज मंदिर परिसर में मौजूद - फोटो : अमर उजाला

राजनीतिक विरोध के कारण नहीं बन सका

नगर पालिका द्वारा संग्रहालय बनाने के लिए टेंडर लगा दिए गए थे। काम भी शुरू हो चुका था, लेकिन राजनीतिक विरोध के चलते संग्रहालय नहीं बन पाया। हमने संग्रहालय के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है, अनुमति मिलते ही निर्माण शुरू किया जाएगा। - अनुज गुप्ता, नगर पालिका अध्यक्ष

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