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जानिए, आखिर क्यों मोदी सरकार ने उत्तराखंड में खेला दलित कार्ड

Wed, 06 Jul 2016 08:27 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, हल्द्वानी
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narendra modi and amit shah - फोटो : Getty Images
उत्तराखंड में विवाद थामने, संतुलन साधने और युवा चेहरे को तरजीह देने की कोशिश में अल्मोड़ा से लोकसभा सांसद अजय टम्टा दिग्गजों से बाजी मार ले गये। पार्टी सूत्रों की माने तो संघ के साथ बेहतर तालमेल भी अजय टम्टा के काम आया है। अभी तक भगत सिंह कोश्यारी के समर्थक ही भगत दा के केंद्र में मंत्री बनाये जाने की उम्मीद लगाये बैठे थे।
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amit shah - फोटो : amar ujala
भाजपा के साथ सबसे बड़ी मुसीबत यह भी है कि उत्तराखंड उसके लिए खासी बड़ी पहेली साबित हो रही है। हाल ही में प्रांतीय परिषद की बैठक में हल्द्वानी पहुंचे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह तो यहां तक कह गये कि  उत्तराखंड में नहीं जीते तो क्या जीते। राष्ट्रपति शासन लगाने में नुकसान उठाने के बाद से ही भाजपा प्रदेश में बंधे-बंधाये फार्मूले से अलग हटने के लिए मजबूर भी हो गई थी।
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ajay tamta
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट भी इस समय कुमाऊं से हैं। ऐसे में नैनीताल सांसद भगत सिंह कोश्यारी को केंद्र में तरजीह देने पर गढ़वाल की उपेक्षा की तोहमत का खतरा भी था। दूसरी और पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार सांसद रमेश पोखरियाल निशंक के समर्थक भी संतुलन के लिहाज से उम्मीद लगाये बैठे थे। निशंक को ठीक चुनाव से पहले जगह देने पर कांग्रेस को बैठे-बिठाये एक मुद्दा देने का खतरा भी था।

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ajay tamta
ऐसे में इस आपसी विवाद को थामने के लिए अजय टम्टा के हाथ बाजी जाने दी गई। दूसरी ओर, इस बहाने गढ़वाल और कुमाऊं के संतुलन को साधने की कोशिश भी की गई है। अब भाजपा के लिए गढ़वाल से चुनाव में चेहरा तलाश करना ज्यादा आसान भी हो सकता है। हालांकि भाजपा का एक खेमा यह भी कह रहा है कि मुख्यमंत्री हरीश रवत के सामने किसी चेहरे को प्रोजेक्ट करने से भाजपा शायद बचेगी।
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pm modi
दूसरी ओर, अजय टम्टा को संघ की नजदीकी का फायदा भी मिला है। 2014 के लोक सभा चुनाव में अजय टम्टा को संघ के दबाव में टिकट मिलने का दावा किया जाता रहा है। यह कनेक्शन एक बार फिर से काम आया है।
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कोश्यारी - फोटो : अमरउजाला
वहीं, यह भी कहा जा रहा है कि अजय टम्टा को उनके युवा होने का भी फायदा मिला। पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी और पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी 70 की उम्र पार कर चुके हैं। युवा निशंक भी हैं पर निशंक कांग्रेस के सीधे निशाने पर रहे हैं।
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अजय टम्टा को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिली है। - फोटो : अमरउजाला
वहीं, अजय टम्टा को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया जाना दलित विरोधी छवि से बाहर निकलने की छटपटाहट को भी माना जा रहा है। हालांकि, यह अभी साफ नहीं है कि भाजपा को इसका फायदा विधानसभा चुनाव में कितना मिलेगा।
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भगत सिंह कोश्यारी
केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार में सांसद भगत सिंह कोश्यारी से अधिक सांसद अजय टम्टा को तरजीह मिलना पार्टी में नए समीकरणों की ओर इशारा कर रहा है। जिस तरह प्रदेश में सियासी संकट के दौरान कोश्यारी सक्रिय रहे उससे माना जा रहा था कि केंद्रीय लीडरशिप उन्हें मंत्रिमंडल विस्तार का हिस्सा जरूर बनाएगी।

Publised By : Nirmala Suyal
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