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ये हैं अंग्रेजों के जमाने का अनोखा 'मिनरल वॉटर' स्रोत

Fri, 12 Jun 2015 04:34 PM IST
टीम डिजिटल / अमर उजाला, देहरादून
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एक ओर जहां देहरादून में जगह-जगह दूषित पेयजल आपूर्ति की शिकायत आती है, वहीं घंटाघर से महज सात किमी दूरी पर स्थित नालापानी में ऐसा प्राकृतिक स्रोत है, जिसकी चर्चाएं दूर-दूर तक हैं। स्वजल की ओर से हुए सर्वे में यह पानी मिनरल वाटर की तरह स्वच्छ पाया गया है।
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ये हैं अंग्रेजों के जमाने का अनोखा 'मिनरल वॉटर' स्रोत

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लोगों का कहना है कि इस पानी से रोगों से तो मुक्ति मिलती ही है, साथ में पाचन शक्ति भी बढ़ती है। गांव के बच्चों को भी इस शुद्ध पानी की ऐसी आदत पड़ गई है कि वो शहरी क्षेत्रों का पानी नहीं पीते, बल्कि कहीं भी जाते हैं तो अपनी पानी की बोतल जरूर साथ रख लेते हैं। इस स्रोत की खोज अंग्रेजों ने की थी।
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यही कारण है कि गांव के लोग कहीं भी जाते हैं तो अपना पानी साथ ले जाते हैं। तपोवन रोड स्थित नालापानी गांव में दूर दूर से लोग पानी के लिए आते हैं। क्लेमेंटटाउन, नेहरूकॉलोनी, जोगीवाला, सुद्धोवाला तक से लोग यहां पानी के लिए पहुंचते हैं। वजह यह है कि बेंत की जड़ों से आने वाला यह पानी सेहत के लिए बेहद अच्छा है।
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खलंगा जाते हुए तपोवन रोड पर नालापानी गांव में यह श्रोत है। शिव मंदिर से पहले बायें हाथ पर स्थित इस स्रोत को पानी की टंकी बनाकर ढका गया है। स्रोत से आने वाली लाइन से एक कनेक्शन गांव के कुछ लोगों को दिया गया है तो दूसरी लाइन लोगों के लिए खुली छोड़ी गई है।
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