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बेटे की शहादत पर गर्व से भर उठे पिता, बोले-‘राहुल के साथ होता तो दो-चार को मैं भी मार देता’

Thu, 23 Jan 2020 06:20 PM IST
अलका त्यागी सतीश जोशी ‘सत्तू’ , अमर उजाला, चंपावत
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- फोटो : अमर उजाला
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए राहुल रैंसवाल के घर में शहादत के बाद देशभक्ति का ज्वार बह रहा है। सेना में रह चुके शहीद के पिता वीरेंद्र रैंसवाल कहते हैं ‘मैं भी अगर राहुल के साथ होता तो चार आतंकियों को तो मार ही देता।’ वह कहते हैं कि अब समय आ गया है कि पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब दिया जाए। 
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- फोटो : अमर उजाला
राहुल के घर पहुंचे सेना के पूर्व अधिकारी और पूर्व सैनिकों ने राहुल की शहादत को नमन करते हुए कहा कि हमारी सेना और प्रधानमंत्री को पाकिस्तान को करारा जवाब देना चाहिए। एक के बदले चार शव दुश्मन के आने चाहिए। लोगों ने राहुल के घर में वंदे मातरम्, भारत माता की जय, राहुल जिंदाबाद, राहुल तेरा यह बलिदान, याद रखेगा हिंदुस्तान आदि के नारे लगाए। 
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- फोटो : अमर उजाला
शहीद राहुल रैंसवाल के पिता वीरेंद्र सिंह रैंसवाल बेटे की शहादत की खबर सुनने के बाद से एक बार भी नहीं रोए। जिगर के टुकड़े को खोने के बाद भले ही वे गमगीन हैं लेकिन उन्हें बेटे की इस शहादत पर बेहद गर्व है। आरआर में कुछ ही दिनों बाद बेटे के ढाई साल पूरे होने थे।

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- फोटो : अमर उजाला
यहां से दूसरी जगह पोस्टिंग मिली थी मगर बेटे को तो भारत माता की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देना था। 57 साल के वीरेंद्र सिंह कहते हैं कि जवानों की ऐसी कुर्बानी पाकिस्तान को भारत की ओर आंख दिखाने से रोकती है। इस उम्र में उनकी खुद की तमन्ना कंधे से कंधा मिलाकर पाकपरस्त आतंकवाद को खत्म करने में सहभागी बनने की है।
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- फोटो : अमर उजाला
वह कहते हैं कि ऐसे लाल हर जगह पैदा हों, यही उनकी तमन्ना है। उन्होंने कहा कि राहुल के अंदर सेना में भर्ती होकर देश सेवा करने का जुनून बचपन से ही था। हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद राहुल ने अपने बड़े भाई की तरह सेना में भर्ती होने के लिए तैयारियां तेज कर दीं थीं।
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- फोटो : अमर उजाला
इस बीच उसके मौसा चंचल सिंह बिष्ट ने जब पढ़ाई लिखाई में ध्यान देने की बात कही तो राहुल ने कहा था कि वह दो साल के भीतर सेना में भर्ती होकर दिखा देगा। चंचल सिंह बताते हैं कि इसके एक साल बाद ही उसने सेना में भर्ती होकर अपना वादा निभाया।
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