नए बन रहे चार पुलों को मिलाकर कुंभनगरी में गंगा पर 60 पुल हो गए हैं। 1950 के कुंभ तक गंगा और नीलधारा के उस पार जाने के लिए एक भी पुल नहीं था। मायापुर में एक पुल अंग्रेजों का बनवाया था, जो हरिद्वार से कानपुर तक जा रही गंगा नहर का पहला पुल था, लेकिन यह पुल डामकोठी जाने के ही काम आता था, जहां अंग्रेज अधिकारी ठहरा करते थे।