उत्तर भारत का प्रसिद्ध मां पूर्णागिरि मेला शुरू हो गया है। कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने प्रवेशद्वार ठुलीगाड़ में रिबन काटकर मेले का उद्घाटन किया। पहले दिन 40 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने मंदिर में दर्शन किए। मेला तीन महीने तक चलेगा। पहले दिन ठुलीगाड़ में महिलाओं ने कलश यात्रा निकाली और छोलिया नृत्य ने भी छटा बिखेरी।
कमिश्नर ने कहा कि यहां उमड़ने वाले श्रद्धालुओं को देखते हुए पूर्णागिरि मेले को राजकीय मेले का दर्जा दिया जाना चाहिए। इसके लिए अपनी ओर से पहल करने के साथ ही डीएम से प्रस्ताव भेजने को कहा गया है। डीएम ने कहा कि मेले को भव्य रूप दिया जाएगा। मेले में आने वाली दिक्कतों और सुझाव लेने के लिए मेला संचालन समिति के एक सदस्य को इस बार जिम्मेदारी सौंपनी चाहिए।
जिला पंचायत अध्यक्ष ज्योति राय की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम में पूर्णागिरि मंदिर समिति के अध्यक्ष पंडित किशन तिवारी, उपाध्यक्ष नीरज पांडेय, सचिव सुरेश तिवारी और कोषाध्यक्ष नवीन तिवारी ने मेले की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए सहयोग देने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि 2023 के मेले से पूर्व पूर्णागिरि धाम के रज्जुमार्ग का काम पूरा होने से लोगों को बड़ी सुविधा मिलेगी।
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पूर्णागिरि मेले का शुभारंभ
- फोटो : अमर उजाला
मां पूर्णागिरि मेले का खास महत्व है। उत्तर भारत का यह सबसे बड़ा मेला माना जाता है। यूपी-बिहार से भी यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसा कहा जाता है कि इस स्थान पर देवी सती की नाभि का भाग गिरा था। शक्तिपीठों में से एक इस शक्तिपीठ को लेकर मान्यता है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण होती है।
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छोलिया नृत्य करते कलाकार
- फोटो : अमर उजाला
डीएम विनीत तोमर ने कहा कि मेले की व्यवस्थाओं को बेहतर करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। एसपी देवेंद्र पींचा ने बताया कि मेले में सुरक्षा के लिए पुलिस बल के अलावा जगह-जगह सीसीटीवी लगाए गए हैं।वहीं मेला मजिस्ट्रेट हिमांशु कफल्टिया ने कहा कि मेले को पर्यटन के लिहाज से विस्तार देने के अलावा कोविड से बचाव के लिए जिले के शुरुआती बिंदु जगबुड़ा सहित कई जगह जांच और अन्य एहतियाती उपाय किए गए हैं।
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पूर्णागिरि मेला
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मां पूर्णागिरि धाम मेले में तीर्थयात्रियों की आवाजाही के लिए जीप-टैक्सियों के अलावा रोडवेज ने भी दस बसें चलाई हैं। वहीं रेलवे 20 मार्च से तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए मेला स्पेशल सवारी गाड़ी चलाएगा। यह ट्रेन कासगंज-टनकपुर-कासगंज के बीच रविवार से 15 जून तक चलेगी।
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पूर्णागिरि मेला
- फोटो : अमर उजाला
पूर्व दर्जा मंत्री शिवराज कठायत, पूर्णागिरि क्षेत्र की ग्राम प्रधान मंजू पांडेय, योगेश पांडेय, देव कलोनी, मनोज पांडेय, मोहन पांडेय, जगदीश तिवारी, जिला पंचायत सदस्य किरन देवी, एडीएम एससी द्विवेदी, मेलाधिकारी भगवत पाटनी, सीओ अविनाश वर्मा, एसएसबी के एसी आरएन विश्वास, एआरटीओ सुरेंद्र कुमार, तहसीलदार पिंकी आर्य इस दौरान मौजूद रहे।
बीते दो वर्षों तक यह मेला कोरोना की भेंट चढ़ा। साल 2020 में मेला सिर्फ सात दिन चला। 2021 में भी मेला तीन सप्ताह भी नहीं चल सका। दोनों बार कोरोना की वजह से श्रद्धालु नहीं आ सके। मेले से होने वाली आर्थिक गतिविधियां भी ठप रहीं।
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मेले में पहुंचते श्रद्धालु
- फोटो : अमर उजाला
देवी मां के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का उमड़ना शुक्रवार देर शाम से ही शुरू हो गया। रविवार को भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं पहुंचे। इसके मद्देनजर प्रशासन ने इस बार मेले में व्यापक बंदोबस्त किए हैं। स्वास्थ्य शिविर से लेकर साफ-सफाई ओर ककरालीगेट से मुख्य मंदिर तक के 21 किमी हिस्से में पथ प्रकाश की उम्दा व्यवस्था है।
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मेले के शुभारंभ पर पहुंचे गढ़वाल कमिश्नर दीपक रावत
- फोटो : अमर उजाला
ठुलीगाड़, भैरव मंदिर और काली मंदिर में खोया-पाया केंद्र बनाया गया है। इन व्यवस्थाओं के बीच पहले दिन व्यवस्थाओं में कई कमियां भी नजर आईं। दूसरे जिलों का पुलिस बल शुभारंभ होने तक नहीं पहुंच सका था। रानीघाट, हनुमानचट्टी और आसपास शार्टकट वाले रास्तों में बैरिकेटिंग नहीं किए जाने से श्रद्धालु ऐसे जोखिम भरे मार्गों से भी आवाजाही कर रहे हैं।
मां पूर्णागिरि के दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, सड़क पर लगा लंबा जाम
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इन जगहों में अक्सर श्रद्धालु गिरकर चोटिल होते रहे हैं। मेला क्षेत्र में कुछ जगह पेयजल किल्लत भी है। खासकर काली मंदिर, नागा क्षेत्र और टुन्नास में पानी की सबसे ज्यादा कमी है। मेला मजिस्ट्रेट हिमांशु कफल्टिया का कहना है कि मेले की खामियों को दूर कर श्रद्धालुओं को अधिकतम सुविधा दी जाएगी।