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द्रोणनगरी में घुट रहा जीवनदायी पेड़ों का दम, नहीं मिल पाई ‘आजादी’, तस्वीरें

Sat, 08 Aug 2020 10:37 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • धरे रह गए वन विभाग के दावों, सीमेंट के चबूतरों और जालियों में कैद हैं हरेभरे पेड़
  • पेड़ों पर कीलों से ठोके गए हैं निजी कंपनियों के विज्ञापन
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- फोटो : amar ujala
राजधानी देहरादून में संकटग्रस्त पेड़ों को ‘आजादी’ नहीं मिल पाई है। शहर में ऐसे तमाम पेड़ मौजूद हैं, जिनके आसपास सीमेंट और ईंटों के चबूतरे बना दिए गए हैं या लोहे की जाली लगाकर उन्हें कैद कर दिया गया है।
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- फोटो : amar ujala
इतना ही नहीं तमाम कंपनियों ने पेड़ों पर लोहे की कीलें ठोककर उन पर विज्ञापन लटका दिए हैं। पिछले वर्ष अमर उजाला ने ‘ट्री को करो फ्री’ अभियान चलाकर पेड़ों के दर्द को उजागर किया तो वन विभाग हरकत में आया था।
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- फोटो : amar ujala
प्रभागीय वनाधिकारी के निर्देश पर विभागीय टीमों ने कई दिनों तक शहर में जांच अभियान चलाया। इसके तहत पेड़ों पर लटके विज्ञापनों के होर्डिंग, बैनर, पोस्टर आदि हटाए गए।

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- फोटो : amar ujala
साथ ही कई को नोटिस भी जारी किए गए। उसके बाद वन विभाग की कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली गई। अमर उजाला ने करीब एक साल बाद शहर में पेड़ों का जायजा लिया तो स्थिति बेहद खराब नजर आई।  
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- फोटो : amar ujala
जिन पेड़ों के आसपास जालियां लगाने के साथ ही चबूतरे बनाए गए हैं, उन्हें हटाया जाएगा। जहां तक पेड़ों में कीलें ठोककर विज्ञापन के होर्डिंग, बैनर लगाने का सवाल है तो इसको लेकर जल्द अभियान चलाया जाएगा। संबंधित कंपनियों को नोटिस जारी कर वन संरक्षण अधिनियम की धाराओं में कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
- राजीव धीमान, प्रभागीय वनाधिकारी, देहरादून वन प्रभाग
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