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जानिए दुनिया के सबसे ऊंचे शिवालय का रहस्य, शिव ही नहीं भगवान राम से भी है कनेक्शन

Tue, 22 Aug 2017 09:40 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, देहरादून
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tungnath
भगवान श‌िव की मह‌िमा अद्भुत है। देवों के देव महादेव के व‌िश्व में सबसे ऊंचे श‌िवालय में जो भी जाता है उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस मंद‌िर से भगवान राम का भी कनेक्‍शन है। चल‌िए जानते हैं इसका रहस्य। 
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tungnath highest temple of lord shiva
भगवान श‌िव का यह मंदिर तुंगनाथ उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग ज‌िले के चोपता से तीन किलोमीटर दूर स्थित है।  यहां की खूबसूरती देखते ही बनती है। यह सबसे ऊंचाई पर स्‍थ‌ित है। इसकी महत्ता इसल‌िए भी बढ़ जाती है क्योंक‌ि यह पंच केदारों में से एक माना गया है।  कहते हैं कि तुंगनाथ में 'बाहु' यानि शिव के हाथ का हिस्सा स्थापित है। यह मंदिर करीब एक हजार साल पुराना माना जाता है।
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tungnath highest temple of lord shiva
कहते हैं कि लंकापति रावण का वध करने के बाद रामचंद्र ने तुंगनाथ से डेढ़ किलोमीटर दूर चंद्रशिला पर आकर ध्यान किया था। रामचंद्र ने यहां कुछ वक्त बिताया था। चौदह हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित चंद्रशिला बनी है। जहां जाते ही अद्भुत नजारा देखने को म‌िलता है।

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tungnath highest temple of lord shiva
कहते हैं कि यहां रामचंद्र ने अपने जीवन के कुछ क्षण एकांत में बिताए थे। पंचकेदारों में द्वितीय केदार के नाम प्रसिद्ध तुंगनाथ की स्थापना कैसे हुई, यह बात लगभग किसी शिवभक्त से छिपी नहीं। कहा जाता है कि महाभारत के युद्ध के बाद पांडव अपनों को मारने के बाद व्याकुल थे। 
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बुधवार को विधि-विधान के साथ खुले तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के कपाट। इस मौके पर एक हजार से अधिक भक्त मौजूद रहे। - फोटो : Amar Ujala
इस व्याकुलता को दूर करने के लिए वे महर्षि व्यास के पास गए। व्यास ने उन्हें बताया कि अपने भाईयों और गुरुओं को मारने के बाद वे ब्रह्म हत्या के कोप में आ चुके हैं। उन्हें सिर्फ महादेव शिव ही बचा सकते हैं। व्यास ऋषि की सलाह पर वे सभी शिव से मिलने हिमालय पहुंचे लेकिन शिव महाभारत के युद्ध के चलते नाराज थे।
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 इसलिए उन सभी को भ्रमित करके भैंसों के झुंड के बीच भैंसा (इसीलिए शिव को महेश के नाम से भी जाना जाता है) का रुप धारण कर वहां से निकल गए। लेकिन पांडव नहीं माने और भीम ने भैंसे का पीछा किया। इस तरह शिव के अपने शरीर के हिस्से पांच जगहों पर छोड़े। ये स्थान केदारधाम यानि पंच केदार कहलाए।
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तुंगनाथ - फोटो : file photo
बताया जाता है क‌ि  पांडवों ने ही इस मंदिर की स्थापना की थी। तुंगनाथ की चोटी तीन धाराओं का स्रोत है, जिनसे अक्षकामिनी नदी बनती है। पुराणों में कहा गया है कि रामचंद्र शिव को अपना भगवान मानकर पूजते थे। 
(अमर उजाला इन तथ्यों की तस्दीक नहीं करता है, यह केवकल मान्यताओं के आधार पर पेश क‌िए गए हैं।)
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