नई दिल्ली में 1979 को जन्मे रोहित शेखर तिवारी एनडी तिवारी और उज्ज्वला शर्मा की जैविक (बायोलॉजिकल) संतान थे। साल 2008 में रोहित एनडी तिवारी के खिलाफ अदालत पहुंचे थे। रोहित ने दावा किया था कि वह पूर्व कांग्रेस नेता और अपनी मां उज्ज्वला शर्मा के बेटे हैं। एनडी तिवारी ने दिल्ली हाईकोर्ट में इस मामले को खारिज करने की गुहार भी लगाई थी। हालांकि, कोर्ट मे 2010 में कोर्ट ने तिवारी की इस गुहार को खारिज कर दिया था।
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फाइल फोटो
- फोटो : pti
23 दिसंबर 2010 को हाईकोर्ट ने सच्चाई जानने के लिए दोनों का जीएनए टेस्ट कराने का आदेश दिया था। हालांकि, एनडी तिवारी ने इसके खिलाफ भी खूब हाथ-पांव मारे थे और सुप्रीम कोर्ट भी गए थे। लेकिन, वहां भी उन्हें खाली हाथ ही लौटना पड़ा था। रोहित ने जनवरी 2017 में भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली थी। रोहित शेखर तिवारी (39) का मंगलवार शाम उनके हौज खास स्थित निवास पर हृदय गति रुकने से निधन हो गया।
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एनडी तिवारी के पुत्र रोहित शेखर तिवारी का निधन (फाइल फोटो)
- फोटो : Social Media
बता दें कि पिछले साल अप्रैल में ही रोहित की सगाई मध्यप्रदेश की अपूर्वा शुक्ला से हुई थी। अपूर्वा मध्यप्रदेश के इंदौर से ताल्लुक रखती हैं और तब सुप्रीम कोर्ट में वकील के तौर पर प्रैक्टिस कर रही थीं। रोहित और अपूर्वा की सगाई रोहित के दिल्ली स्थित आवास पर हुई थी। मई में रोहित और अपूर्वा परिणय सूत्र में बंध गए थे। इस कार्यक्रम में रोहत के करीबी रिश्तेदारों और मित्रों ने भाग लिया था। सगाई के बाद रोहित और अपूर्वा मैक्स हॉस्पिटल गए थे।
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रोहित शेखर तिवारी
- फोटो : amar ujala
मैक्स अस्पताल में रोहित के पिता एनडी तिवारी का इलाज चल रहा था। रोहित की मां डॉ. उज्ज्वला तिवारी और अपूर्वा के माता-पिता भी अस्पताल गए थे। एनडी तिवारी प्यार से रोहित को गुंजनू बुलाते थे। यह बात रोहित ने खुद बताई थी। दोनों के बीच चल रहा कानूनी विवाद मार्च 214 में खत्म हुआ था, जिसके बाद रोहित अपने पिता के साथ ही रह रहे थे। पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी का लंबी बीमारी के बाद पिछले साल 18 अक्तूबर को निधन हो गया था।
रोहित तिवारी गर्व के साथ कहते थे कि मेरे पिता ने स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई लड़ी, जेल गए, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के साथ समय बिताया। जहां मदन मोहन मालवीय जी के पीए के रूप में काम किया तो वहीं पंडित जवाहरलाल नेहरू के साथ भी काम किया। वर्ष 1952 से 2009 तक मेरे पिता ने देश की पूरी ईमानदारी और लगन से सेवा की है। मुझे लगता है कि अटल बिहारी वाजपेयी और प्रणव मुखर्जी भी इस मामले में उनसे पीछे ही होंगे।